हरिद्वार। 24 वर्ष पूर्व वर्ष 1992 के अर्द्घकुंभ में मौनी अमावस्या पर जो योग पड़े थे, वे इस बार फिर पड़ रहे हैं। कई ग्रहों की स्थिति राशि बदल के कारण नई दिशा में आ गई है। अर्द्घकुंभ का दूसरा स्नान कई मायनों में महत्वपूर्ण होने जा रहा है।
गौरतलब है कि वर्ष 1992 में पड़े अर्द्घकुंभ पर यही योग बने थे। तब तीन फरवरी को सोमवती, मौनी और अर्द्घकुंभ स्नान एक दिन पड़े थे। यह योग पिछले 24 वर्ष में कभी नहीं बना। इस बार आठ फरवरी को बन रहे इन्हीं योगों के बीच विशेष पर्व काल आ गया है। एक साथ तीन योगों के आने से अर्द्घकुंभ का दूसरा स्नान और भी पवित्र माना जा रहा है।
विगत रात्रि राहु अपनी वक्र रति से घूमते हुए अपने शत्रु सूर्य की रशि में प्रवेश कर गया है। इसके विपरीत राहु का मित्र केतु अपने मित्र शनि की राशि में प्रवेश कर रहा है। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार देव गुरु बृहस्पति स्वयं भी वक्र गति से घूम रहे हैं। इनकी यह गति कई नए प्राकृतिक योगों को जन्म देने वाली है। इन्हीं योगों में न केवल हरिद्वार का अर्द्घकुंभ, अपितु उज्जैन में कुंभ स्नान भी पड़ रहे हैं। ऐसे योग में पांच पाप करने वाले जातकों का विमोचन हो जाता है। डा. मिश्रपुरी बताते है कि सभी राशियों पर राहु, केतु, सूर्य और शनि की गतियां प्रभाव डालेंगी। कष्टों से मुक्ति के लिए गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान सर्वश्रेष्ठ है। इस स्नान पर सात प्रकार के अनाज का दान विशेष पुण्यदायी होगा।