वासंतिक नवरात्र में शुक्रवार को मां कालरात्रि का दिन था। इस पर्व पर हजारों श्रद्धालुओं ने देवियों के मंदिरों में पूजन किया। मां काली, मां तारा और बगुलामुखी के मंदिरों में श्रद्धालुओं ने अनुष्ठान कराया। नवरात्र का सातवां दिन भगवती के काली स्वरूप के नाम है। शिव पुराण के अनुसार, एक बार शिव ने देवी पार्वती को काली कहकर संबोधित किया।
उस दिन पार्वती ने काली रूप धारण कर लिया। यह रूप विकराल है और दैत्यों का विनाश करने वाला है। देवी भागवगत कथा के अनुसार, राक्षसों का सर्वनाश करते समय देवी हाथ में खप्पर लेकर काली का रूप धारण किया था। रक्तबीज दैत्य का वध करने के लिए देवी ने धरती पर गिर रही रक्त की सभी बूंदों को अपनी जीभ और खप्पर में भर लिया। देवी के इसी कालरात्रि स्वरूप की पूजा घर-घर की जाती है।
सप्तम कालरात्रि पर सवेरे से ही मंसा देवी, चंडी देवी, सुरेश्वरी देवी, माया देवी, अंजनी देवी, बगुलामुखी, काली, दक्षिण काली, तारा, महिषासुरमर्दिनी, मकरवाहिनी आदि के मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। कालरात्रि स्वरूप की आरती सांयकाल दो बार उतारी गई। तीसरी आरती अर्द्धरात्रि में हुई। श्रद्धालुओं ने छठे नवरात्र की रात्रि से सातवें नवरात्र की अर्द्धरात्रि तक व्रत रखकर मां के दर्शन किए।