अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। देवसंस्कृति विवि और शांतिकुंज परिवार के लाखों साधकों ने रविवार को श्रावणी पर्व पर रक्षा सूत्र धारण किए। शांतिकुंज अधिष्ठात्री शैल दीदी ने देश-विदेश से आए एवं आश्रमवासी साधकों की कलाई में रक्षासूत्र बाधकर सबको पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
शैल दीदी ने कहा कि रक्षासूत्र मात्र कच्चा धागा होता है, लेकिन इसमें जब इसमें श्रद्धा और भावना की शक्ति जुड़ जाती है तो यह इतना मजबूत हो जाता है जिसे तोड़ना नामुमकिन हो जाता है। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डा. प्रणव पंड्या ने कहा कि पवित्र संबंधों को स्थापित करने वाला श्रावणी पर्व के माध्यम से अपने अंदर ब्राह्मणत्व का भाव पैदा करें। संस्कृति की रक्षा करने के लिए तत्पर रहें। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में श्रावणी के दिन वेदारंभ संस्कार होते थे। इससे युवाओं को ज्ञानवान बनाने के साथ संस्कृति की रक्षा के लिए तैयार करने का कार्य होता था। उन्होंने कहा कि देसंविवि के युवाओं को इस दिशा में सार्थक दिशा दी जा रही है।
देसंविवि और शांतिकुंज तथा देश भर से आए साधकों ने डा. पंड्या को राखी बांधी तथा उनके नेतृत्व में चलाए जा रहे विभिन्न रचनात्मक कार्यों में कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलने का संकल्प व्यक्त किया।
इससे पहले मुख्य सभागार में हेमाद्रि संकल्प संपन्न हुआ। पर्व का महत्व एवं प्रेरणा के विषय पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम संचालकों ने कहा कि यह सृष्टि नियंता के संकल्प से उपजी है। हर व्यक्ति अपने लिए एक नई सृष्टि रचता है। शंतिकुंज की ब्रह्मवादिनी साधकों ने 27 कुंडीय यज्ञशाला में गायत्री महायज्ञ में विश्व कल्याण के लिए विशेष वैदिक मंत्रों के साथ यज्ञ संपन्न कराया। शाम को दीपमहायज्ञ भी संपन्न हुआ।