अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। गंगा में थर्माकोल (प्लास्टिक) की बाढ़ आने से अफरा-तफरी रही। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गंगा में थर्माकोल आने का पता लगाकर उचित कार्रवाई करें।
बुधवार को गंगा में बहता थर्माकोल वेस्ट हरकी पैड़ी तक पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शी महेश गुप्ता ने बताया कि पहले भी कई बार ऐसा देखा गया, किंतुु बुधवार को थर्माकोल वेस्ट की बाढ़ ही आ गई। हरकी पैड़ी पहुंचने पर देखा तो वहां भी थर्माकोल बह रहा था। इसकी जानकारी जिलाधिकारी दीपक रावत तक पहुंची। यह समझा गया कि किसी ने थर्माकोट वेस्ट नाले में डाल दिया होगा जो बहकर घाटों पर आ रहा है।
जिलाधिकारी ने जल संस्थान की अनुरक्षण शाखा (गंगा) के अधिशासी अभियंता अजय कुमार को नालों की जांच करने का निर्देश दिया। डीएम के निर्देश पर अधिशासी अभियंता अजय कुमार ने एई, जेई की टीम के साथ नालों का निरीक्षण किया, पर थर्माकोल कहां से आ रहा है, इसका पता नहीं चला। अजय कुमार ने बताया कि इसके बाद भीमगोडा बैराज पहुंचे तो वहां थर्माकोल प्लास्टिक बड़ी मात्रा में दूर तक फैला तथा जमा दिखाई दिया। उन्होंने बताया कि जांच में प्रथम दृष्टया यह जानकारी में आया है कि ऋषिकेश क्षेत्र में थर्माकोल प्लास्टिक के डिस्पोजल बनाने की कोई फैक्ट्री हो सकती है, जो थर्माकोल वेस्ट को गंगा में बहा देती है। आजकल गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है। इससे पर्वतीय क्षेत्र से भी कूड़ा कचरा गंगा में बहकर आते हैं। इसी आड़ में फैक्ट्री वाला अपना वेस्ट गंगा में बहा देता है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी को रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।