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डामकोठी से जटवाड़ा पुल तक कांवड़ पटरी को तैयार करने में जुटा विभाग

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। कांवड़ यात्रा सकुशल संपन्न कराने के लिए पर्यटन विभाग कांवड़ पटरी तैयार करने में जुटा है। डामकोठी से लेकर जटवाड़ा पुल तक रैलिंग का काम करीब-करीब पूरा हो चुका है। पानी एवं विश्राम स्थल भी तैयार किए जा चुके हैं। हालांकि जटवाड़ा पुल से रुड़की तक नहर पटरी पर कांवड़ यात्रा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। वहां सड़क टूटी है तो पानी के स्टैंड और बिजली व्यवस्था का काम शुरू नहीं हो सका है।
27 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू हो जाएगी। दूर-दराज के कांवड़िये जुलाई के तीसरे सप्ताह से आने शुरू हो जाएंगे। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, मध्य प्रदेश के साथ अन्य क्षेत्रों के कांवड़िये जल लेकर शिवालयों पर जलाभिषेक के लिए रवाना होंगे। हरिद्वार में हरकी पैड़ी से डामकोठी तक कांवड़ियों को रोडीबेलवाला मैदान से अलकनंदा होटल के सामने से निकालते हुए डामकोठी के पीछे बन रहे चैनल स्कैप से शंकराचार्य चौक से कांवड़ पटरी पर पहुंचाया जाएगा। इस बार कांवड़ पटरी को गंगनहर के किनारे-किनारे से जटवाड़ा पुल तक ले जाया जाएगा। इसके लिए कांवड़ पटरी पर लोहे की मजबूत रैलिंग लगवा दी गई है। कांवड़ पटरी पर गेट भी बनाए गए हैं, ताकि किसी भी समय पटरी पर आवाजाही रोकी जा सके। पानी की व्यवस्था के लिए रेलवे ट्रैक के पास ट्यूबवेल तैयार हो गया है। इसके साथ ही सात पेयजल स्टैंड बनाए गए हैं। बैठने के लिए भी जगह-जगह स्टैंड बनाए गए हैं। ज्वालापुर के सामने रेलवे ट्रैक के पास ही लंगर चलवाने लिए रसोई एवं ठहरने के लिए विश्रामालय बनवा दिया गया है। हालांकि अभी सोलर लाइट लगवाने एवं पौधारोपण करना शेष रह गया है। अधिकारियों की मानें तो यह काम भी समय रहते हुए पूरा कर लिया जाएगा।
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इस बार जटवाड़ा पुल से निकलेंगे कांवड़िये
पहले कांवड़ियों का आवागमन सिंहद्वार से ज्वालापुर की ओर से होता था। अति संवेदनशील क्षेत्र होने से पुलिस प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा बढ़ाने के साथ सतर्कता बरतनी पड़ती थी, लेकिन इस बार कांवड़ यात्रियों के लिए तैयार हुई कांवड़ पटरी से निकालते हुए सीधे जटवाड़ा पुल तक पहुंचा दिया जाएगा। इससे शहर के अंदर से आने वाले कांवड़िये ही ज्वालापुर से निकल सकेंगे।

जटवाड़ा पुल से आगे नहीं कोई तैयारी
बहादराबाद। कांवड़ मेले की तैयारियों को लेकर जटवाड़ा पुल से आगे कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है। कांवड़ यात्रा के निर्धारित किया गया कांवड़ पटरी मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुका है। साल में दो बार यहां से कांवड़ गुजरने के बावजूद इसे स्थायी रूप से ठीक नहीं किया गया है।
कांवड़ शुरू होने में महज एक माह शेष होने के बावजूद मेला प्रशासन इस मार्ग की सुध लेने को तैयार नहीं दिख रहा है। जटवाड़ा पुल से बहादराबाद होते हुए जाने वाले कांवड़ मार्ग की स्थिति काफी खराब है। रानीपुर झाल से नहर पटरी जगह-जगह उखड़ी है। इससे नंगे पैर चलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। शौचालयों की भी कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई है।

धनौरी से कलियर-रुड़की तक अव्यवस्था
धनौरी। कांवड़ पटरी के गड्ढ़ों को भरने के साथ कांवड़ पटरी की सड़क की मरम्मत करने का काम शुरू नहीं हो सका है। मार्ग पर कई जगह नहर की सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त है। कांवड़ पटरी के अलावा डाइवर्जन मार्ग का भी ऐसा ही हाल है।
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हरिद्वार से लेकर नारसन तक कांवड़ पटरी करीब 50 किमी लंबी है। पिछले साल कांवड़ यात्रा के दौरान आनन-फानन मे तैयारियां की गई थी। प्रशासन की तरफ से कांवड़ यात्रा के दौरान केवल पेयजल के लिए स्थायी व्यवस्था करते हुए जगह-जगह वाटर पोस्ट लगाए गए थे। इन वाटर पोस्ट की कांवड़ यात्रा के दौरान ही टोंटियां गायब हो गई थी जो आज तक नहीं लग पाई। वहीं कांवड़ पटरी के किनारे झाड़ियां भी साफ नहीं की गई है। धनौरी से लेकर नारसन तक कांवड़ पटरी अधिकांश स्थानों पर क्षतिग्रस्त है। धनौरी से लेकर नारसन तक नहर पटरी मार्ग पर लगे करीब एक दर्जन हैंडपंपों में तीन या चार ही चल रहे हैं। ऐसे में प्रशासन को पेयजल की व्यवस्था नए सिरे से करनी होगी। समय रहते कांवड़ पटरी पर व्यवस्थाएं दुरुस्त करना प्रशासन के लिए कड़ी चुनौती होगी।
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