अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर निगम के नए कार्यालय भवन निर्माण की डीपीआर अधिकारियों ने अब तक शासन को नहीं भेजी है। जबकि मेयर मनोज गर्ग ने डीपीआर अनुमोदित कर शासन की स्वीकृति के लिए नगर आयुक्त को भेज दिया था।
नगर निगम कार्यालय भवन निर्माण की डीपीआर उत्तराखंड पेयजल निर्माण निगम ऋषिकेश से तैयारी कराई गई थी, लेकिन बाद में कार्यदायी संस्था के रूप में ग्रामीण निर्माण विभाग का चयन किया गया। मेयर मनोज गर्ग की हार्दिक इच्छा है कि नए कार्यालय भवन का शिलान्यास उनके कार्यकाल हो जाए, किंतु अब तक प्रपोजल की फाइल नगर निगम के निर्माण विभाग में ही धूल फांक रही है।
अधिकारी एक ओर जहां नए कार्यालय भवन निर्माण की डीपीआर दबाकर बैठे हैं, वहीं दूसरी ओर जर्जर पुराने कार्यालय भवन की मरम्मत ने नाम पर लाखों रुपये खर्च करने जा रहे हैं। मरम्मत का काम शुरू भी हो गया है।
नगर निगम के नए कार्यालय भवन निर्माण के डिजायन में कुछ बदलाव के बाद ही शासन की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। लगभग 10 लाख रुपये से पुराने भवन की मरम्मत का निर्णय भी पहले का है। अब 4- 5 लाख रुपये ही खर्च किए जाएंगे। पुराने भवन की मरम्मत व रंगाई-पुताई तथा छत ठीक कराई जा रही है, ताकि वह एक-डेढ़ साल तक चल जाए।
- अनंत कुमार सैनी प्रभारी अधिशासी अभियंता नगर निगम
मेयर को अपनी सरकार से जूझना पड़ रहा है
मेयर मनोज गर्ग वर्ष 2015 से नगर निगम के नए बहुउद्देश्य कार्यालय भवन निर्माण के लिए जूझ रहे हैं। कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा लेकर उन्होंने अर्द्धकुंभ मेला 2016 के समय 5 करोड़ 60 लाख रुपये स्वीकृत का प्रस्ताव स्वीकृत भी करा लिया था, परंतु धनराशि अवमुक्त नहीं हुई। भाजपा सरकार बनने से उन्हें उम्मीद थी कि अब स्वीकृत भवन निर्माण की धनराशि जारी हो जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। मेयर की मजबूरी यह है कि वह अपनी सरकार के खिलाफ कुछ बोल भी नहीं पा रहे हैं। हालांकि वह आशान्वित हैं कि नगर निगम का नया सभागार व कार्यालय भवन निर्माण की बाधा जल्दी दूर हो जाएगी।