ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
सोमवार को सोमवती मौनी अमावस्या पर देश के अनेक राज्यों से आए करीब आठ लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर धर्म लाभ कमाया। कड़ाके की ठंड के बीच अलसुबह से शुरू हुआ स्नान देर शाम तक चलता रहा। वहीं महिलाओं ने पीपल के वृक्षों की पूजा अर्चना कर मन्नतें मांगी। श्रद्धालुओं ने गंगा के घाटों पर देव और पितृ कर्मकांड संपन्न कराए गए।
माघ मास की मौनी अमावस्या का स्नान सोमवार को अलसुबह ही शुरू हो गया था। भारी ठंड और कोहरे के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरकी पैड़ी सहित गंगा के अनेक घाटों पर स्नान करने पहुंचे। संयोग यह रहा कि भगवान भास्कर दो घंटे कोहरे में डूबे रहने के बाद उदित हो गए, जिसका असर धीरे-धीरे स्नानार्थियों की भीड़ पर पड़ता रहा। सवेरे नौ बजे के बाद स्नानार्थी तेज गति से हरकी पैड़ी पर पहुंचे लगे। इसके बाद हरकी पैड़ी और मालवीय द्वीप पर स्नान दोपहर बाद तक चलता रहा। स्नानार्थियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद दान किया। महिला श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद पीपल के वृक्षों पर सूत के धागे लपेटते हुए परिक्रमा की और 108 वस्तुएं दान में दी। इसी तरह कई घाटों पर सोमवती अमावस्या की कथा सुनने के लिए महिलाओं के समूह बैठे दिखाई दिए। श्रद्धालुओं ने स्नान और परिक्रमा के लिए पुरोहितों के स्थानों पर जाकर दान पुण्य किया। चूंकि अमावस्या पितरों का दिन भी होता है, इसलिए श्रद्धालुओं ने कुशाव्रत और नारायणी शिला पर पितृ कर्मकांड संपन्न कराए। सोमवती अमावस्या धारण करने वाली महिलओं ने भी गंगा के अनेक घाट पर दान किया।
स्नान करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं में अधिकांश भीड़ पंजाब, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के यात्रियों की थी। हरकी पैड़ी से सटे क्षेत्रों से सायंकाल तक भीड़ जुटी रही। वहीं दूसरी ओर बाजारों में जोरदार भीड़ रही, इससे व्यापारियों के चेहरे भी खिले रहे।