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श्रावण के बाद अब जाहरदीवान गोगावीर पूजा की तैयारियां

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। धर्मनगरी में अब जाहरदीवन की यात्रा चल रही है। गोगावीर को पूजने के लिए श्रद्धालु राजस्थान गंगानगर के बागड़ जा रहे हैं। वहां से लौटकर कंदूरी भोजों को आयोजन हो रहा है। यह सिलसिला गुघाल मेले तक चलेगा। इस बार गुघाल श्रावण शुक्ल त्रयोदशी 22 सितंबर को पड़ेगा।
श्रावण बीतते ही बागड़ यात्रा शुरू होती है। हरिद्वार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लाखों श्रद्धालु बागड़ जाते हैं, जहां गोगावीर का प्रमुख स्थान है। वहां से लौटने के बाद कंदूरी भोज शुरू हो जाते हैं। इन भोजों में कढ़ी चावल का प्रसाद जरूरी है। इन दिनों श्रद्धालु बागड़ भी जा रहे हैं और लौटकर भोज भी करने लगे हैं। कुुछ दिनों बाद धर्मनगरी में गोगावीर की छड़ी यात्रा शुरू होगी। नगर भ्रमण के बाद पवित्र छड़ी 21 सितंबर की शाम को ज्वालापुर के गुघाल मेला परिसर पहुंचेगी। तब यहां मेला शुरू हो जाएगा। तीन दिन की शेष पूजा गोगावीर की माडी पर होगी। इस पूजा में छड़ी की पूजा का विशेष विधान है। तीन दिनों तक जोगी संप्रदाय के परंपरागत गायक रात भर गीतों की गंगा डमरु की धूम पर बहाएंगे। मेले में बिकने वाला चकोतरा फल अभी से बाजार में आ गया है।
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पंचपुरी के ज्वालापुर और कनखल में विशेष रूप से गोगावीर के पर्व लगभग महीने भर मनाए जाते हैं। बुड्ढी माता के मंदिर पर भी गुघाल सजता है। इस पर्वों के लिए कंदूरी भोजों का खास महत्व है। ये भोज शुरू होने के साथ घरों में स्थापित गोगावीर के थान पर इन दिनों पूजा शुरू हो चुकी है।
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दो स्थानों पर शिव भोजों का आयोजन
हरिद्वार। पौराणिक मंदिर बिल्वकेश्वर महादेव में दाऊदयाल अग्रवाल के संयोजन में विशाल शिविर का आयोजन किया गया। पं. हुकुम चंद की प्ररेणा से चल रहे भोज का यह 36वां वर्ष था। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवन बिल्वकेश्वर के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया। ऐसा ही शिव भोज ज्वालापुर चाकलान स्थित शिव मंदिर में उमाकांत दीक्षित के संयोजन में प्रसाद रूप में आयोजित किया गया।

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