ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि संगठित रहने वाला समाज ही तरक्की करता है। जो समाज संगठित नहीं रहते, वे प्रगति के पथ पर पिछड़ जाते हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति को विश्व में बेजोड़ बताया और राष्ट्रभक्ति को परमधर्म बताया।
जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज मंगलवार को रोड़ी बेलवाला स्थित आनंद वन समाधि आश्रम में आयोजित आध्यात्मिक समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज हिंदू समाज हर तरीके से समृद्ध है, लेकिन सबसे ज्यादा समस्या इस बात की है कि हमारे यहां एकता का अभाव है। जिस कारण यह समाज समुचित प्रगति नहीं कर पा रहा है। यही वजह है कि अन्य संप्रदायों की अपेक्षा हिंदू समाज को विघटन के दौर से गुजरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मुस्लिम समाज और इसाई धर्म के अनुयाईयों में एकता है, उतनी एकता हमारे यहां नहीं है। संभवत: इसी वजह से कुछ दलों के राजनेता हिंदुओं के प्रति उपेक्षा का भाव रखते हैं। साथ ही उन्होंनें कहा कि इसका एक दूसरा पक्ष भी है। हिंदू समाज की जैसी एकता कुंभ के मौके पर दिखाई देती है, वह बेजोड़ है। हमें ऐसी ही एकता पर ध्यान देना होगा। उन्होंने संत समाज में भी एकता पर बल दिया। जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय सचिव स्वामी प्रेमानंद महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी देवानंद महाराज, स्वामी हरिचेतनानंद महाराज, महामंउलेश्वर स्वामी अनंत महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी आत्मानंद, महामंडलेश्वर सुरेश मुनि महाराज, उदासीन बड़ा अखाड़ा के कोठारी प्रेमदास महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी श्यामसुंदर महाराज, भजनगढ़ से आए महंत मोहनदास महाराज समेत बड़ी संख्या में संतों ने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश राव सोनी तथा राज्यसभा सदस्य आरके सिन्हा ने संतों के सानिध्य में महामानव मृत्युंजय महाराज की सिद्ध समाधि पीठ पर पूजा अर्चना और आश्रम में रुद्राभिषेक किया। आनंद वन समाधि के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी चिदविलासानंद सरस्वती महाराज ने सभी संतों और अतिथियों का स्वागत करते हुए आश्रम की ओर से भारतीय संस्कृति के व्यापक प्रचार-प्रसार का संकल्प दोहराया।