हरिद्वार के आगामी कुंभ मेले को पूरी तरह से गंगा के मैदान में ले जाने की तैयारी है। शहर से भीड़ का बोझ कम करने के लिए अखाड़ा परिषद ने ही यह पहल शुरू की है। व्यवस्थाओं का निरीक्षण कराने के लिए संत समाज उत्तराखंड के अधिकारियों को प्रयाग ले जाएगा। अखाड़ों की कुंभ छावनियां इस बाद मेला क्षेत्र में ही बनाई जाएंगी और धर्म पताकाएं भी वहीं फहराएंगे।
गौरतलब है कि हरिद्वार में यात्रियों की भारी भीड़ के चलते अखाड़ा परिषद ने पहले ही निर्णय ले लिया था कि कुंभ मेले को चंडी घाट स्थित गंगा के मैदान में फैलाया जाएगा। इसके लिए शहरी विकास मंत्री के नेतृत्व में अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी मैदान क्षेत्र का दौरा संतों के साथ कर चुका है। अखाड़ा परिषद महामंत्री श्रीमंहत हरि गिरि ने बताया कि हरिद्वार कुंभ से पहले प्रयाग का अर्द्धकुंभ होना है, जो कुंभ के ही समान है। प्रयाग अर्द्धकुंभ में साधुओं की जमातें भी स्नान करती है, अत: वह मेला कुंभ जैसा ही भरता है। प्रयाग के कुंभ और अर्द्धकुंभ दोनों ही गंगा के मैदान में प्राचीन काल से भरते आए हैं। हरिद्वार और उत्तराखंड प्रशासन को प्रयाग की भांति की हरिद्वार में व्यवस्थाएं करनी होगी। इसलिए अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल को संत समाज अपने साथ ले जाकर मेला क्षेत्र का भ्रमण कराएगा। उसी तर्ज पर हरिद्वार में भी प्रबंध कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हरिद्वार का अगला कुंभ बहुत बड़ा कुंभ होगा। इसके लिए अभी से व्यवस्थाएं करने की आवश्यकता है।
अगले कुंभ के लिए अखाड़ों की पेशवाईयां मेला मैदानों तक ले जाई जाएंगी। शहर स्थित अखाड़ों में सामान्य कार्यक्रम होंगे, किंतु धर्म ध्वजाएं मेला मैदानों में आवंटित भूमि पर चढ़ेंगी। साधुओं के ढेरे भी वहीं पड़ेंगे और धूने भी वहीं सजेंगे। अत: मेला क्षेत्र में व्यापक प्रबंधों की आवश्यकता है। जब तक उत्तराखंड के अधिकारी मेला क्षेत्र का भ्रमण नहीं करेंगे उन्हें मेले की महत्ता का ज्ञान नहीं हो पाएगा। अत: उनका प्रयाग जाना जरुरी है।