ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार। 16 और 17 जुलाई की रात को इस वर्ष का पहला ग्रहण पड़ रहा है। यह ग्रहण संवत का भी पहला ग्रहण होगा। संयोग से जिस दिन ग्रहण है, उस दिन कई अनेक पर्व भी पड़ रहे हैं। यह चंद्रग्रहण पूरे तीन घंटे चलेगा।
इस वर्ष कुल दो ग्रहण पड़ेंगे। इस चंद्रग्रहण के बाद वर्ष के अंतिम महीने में खंडग्रास सूर्य ग्रहण भी होगा। वह ग्रहण भी करीब ढाई घंटे चलेगा। आमतौर पर ग्रहण का काल इतना लंबा नहीं होता। लेकिन इस बार खंडग्रास भी बहुत लंबा होगा। मंगलवार 16 जुलाई को पूर्वाषाढा नक्षत्र में गुरु पूर्णिमा भी पड़ रही है। इस दिन सूर्य का संक्रमण भी कर्क राशि में हो जाएगा। चंद्र ग्रहण का कुलकाल करीब तीन घंटे रहेगा। इस ग्रहण स्पर्श 16-17 जुलाई की अर्द्धरात्रि 1.31 बजे होगा। ग्रहण का मोक्षकाल तड़के 4.30 होगा। ग्रहण का पूर्ण चरण रात्रि 3.01 बजे हो जाएगा। इस ग्रहण का सूतक गुरु पूर्णिमा की शाम 4.31 बजे लग जाएगा। यह ग्रहण अनेक राशियों पर भारी पड़ेगा। चूंकि ग्रहण का स्पर्श और मोक्ष रात्रि में उस समय है जब अधिकांश लोग सो रहे होते हैं। अत: ग्रहण का स्नान बुधवार को सवेरे होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कोई भी एक तिथि 19 घंटे से 24 घंटे के बीच रहती है। अगर कोई सूर्योदय के पश्चात आती है और अगले दिन सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाए तो वह तिथि क्षय माना गया है। ग्रहण से पूर्व 15 दिसंबर को कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी सवेरे 7.18 बजे लगेेगी और 16 जुलाई को समाप्त होगी। परिणाम स्वरूप चंद्रग्रहण शुरू तो पूर्णिमा में होगा, लेकिन उसका समापन श्रवण कृष्ण प्रतिपदा में होगा। संयोग यह है कि ग्रहण समाप्त होते ही वर्ष की सबसे बड़ी शारदीय कांवड़ यात्रा प्रारंभ हो जाएगी। 17 जुलाई की सवेरे ग्रहण समाप्त होगा और उसी दिन कांवड का जल भरना शुरू हो जाएगा। इस प्रकार यह खंडग्रहण चंद्रग्रहण अनेक योग लेकर आ रहा है। अर्द्धरत्रि में ग्रहण का होना कई प्रकार के अनिष्ठों समाप्त करने वाला है। चूंकि यह ग्रहण आषाढ़ मास की पूर्ण तिथि और श्रावण प्रथम तिथि के मिलन में हो रहा है, अत: ज्योतिष की दृष्टि से 16 जुलाई के बाद अच्छी वर्षा के योग बनेंगे। सूर्य के कर्क राशि में आते ही दो महीने चलने वाली वर्षा ऋतु भी प्रारंभ हो जाएगी।