हरिद्वार। थल सेना के जवानों के साथ देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के एक दल ने माउंट केदार डोम में तिरंगा और देसंविवि का झंडा फहराया। इसके साथ ही गोमुख, तपोवन, कीर्ति ग्लेशियर और भोजवासा आदि स्थानों में सफाई अभियान चलाया। माइनस 28 से 32 डिग्री तापमान के बीच यात्रा कर यह दल कल देर शाम शांतिकुंज लौट आया। मेजर विकास शुक्ला के नेतृत्व में 24 सदस्यीय दल 19 मई को रवाना हुआ था। सकुशल लौटने पर शांतिकुंज प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या और शैलदीदी ने उनका स्वागत किया।
डॉ पंड्या ने कहा कि सेना के साथ मिलकर देसंविवि ने भारत की धरोहर हिमालय क्षेत्र के करीब 22 हजार पांच सौ फीट की ऊंचाई पर तिरंगा और देसंविवि की पताका फहराना सुखद आश्चर्य है। गोमुख और कीर्ति ग्लेशियर में सफाई अभियान चलाना साहस भरा कार्य है। शैलदीदी ने दल के सभी सदस्यों से कुशल क्षेम जानी और उनके साहस को सराहा। डा. पंड्या ने उपवस्त्र और युग साहित्य आदि भेंटकर सदस्यों को सम्मानित किया। दलनायक मेजर विकास शुक्ला ने बताया कि सेना और देवसंस्कृति विवि का 24 सदस्यीय दल 19 मई को रवाना हुआ था। इसमें से 14 सदस्य माउंट केदार डोम तक पहुंचे। अन्य जवान संपर्क बनाए रखने के लिए अलग-अलग शिविरों में थे। उन्होंने बताया कि ऋषिवर आचार्य पं श्रीराम शर्मा और ईश्वर के आशीष से उन्होंने माउंट केदार डोम की यात्रा 11 दिन में पूरी की। माउंट केदार डोम में तिरंगा, सेना और देसंविवि का ध्वज फहराया। यात्रा के दौरान आध्यात्मिक ऊर्जा केन्द्र गोमुख, कीर्ति ग्लेशियर, तपोवन भोजवासा आदि स्थानों से पांच बोरे कचरा एकत्रित किया गया जिसे दल के सदस्य अपनी पीठ पर लादकर नीचे लाए। मेजर शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2005 के बाद कोई दल माउंड केदार डोम पर ध्वज फहराकर सकुशल लौटा है। इस दल में अहमदनगर, जोधपुर और सूरतगढ़ राजस्थान में तैनात सेना के जवान और देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के नरेंद्र गिरि आदि युवा शामिल रहे।