ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
विवाहों के शुुद्ध मुहूर्त बुधवार रात समाप्त हो रहे हैं। देशज और प्रांतज विवाह अलबत्ता 12 जुलाई तक होंगे। गुरुवार से विवाहों का कोई भी शुद्ध मुहूर्त विद्यमान नहीं हैं। 12 जुलाई को देवशयन के बाद विवाहों का यह सीजन पूर्णत: संपन्न हो जाएगा।
नए संवत्सर के बाद शुरू हुआ विवाहों का सीजन अब विराम पर है। इस दूसरे चरण में कुल 24 मुहूर्त थे। बुधवार को उनमें से अंतिम विवाह मुहूर्त पड़ा। जो लोग पंडित से कुंडली मिलकार शुद्ध मुहूर्त की तलाश में रहते हैं, उन्हें गुरुवार से ऐसा कोई शुद्ध मुहूर्त नहीं मिलेगा। प्रांतज विवाह गुण-दोष के आधार पर किए जा सकते हैं।
कनखल के ज्योतिषाचार्य पंडित उदय शंकर जोशी के अनुसार कोई भी विवाह बगैर शुद्ध मुहूर्त नहीं किया जाना चाहिए। क्षेत्रीय आधार पर कोई विवाह करना चाहे तो वह कर ले। प्रत्येक वर्ष चार महीने के लिए देवताओं का शयन होता है। शयन काल में विवाह का कोई भी मुहूर्त नहीं होता। देव शयन इस 12 जुलाई को हो जाएगा। देव जागरण पुन: नवंबर माह में तब होगा जब देवोत्थान एकादशी के दिन देव जागरण हो जाएगा।