हरिद्वार। शांतिकुंज की ओर से देशभर में कराई गई भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की सूची में शामिल हुए विद्यार्थियों का शांतिकुंज में सम्मान समारोह हुआ। प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि देसंविवि दिव्यांग बच्चों का मनोबल बढ़ाने में हर संभव सहयोग करेगा।
गुजरात से आए सात दिव्यांग मेधावियों ने भी सूची में अपना स्थान बनाया। छात्रों ने देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या से अनौपचारिक भेंट की। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों की पीड़ा में हर संभव सहयोग करने वाला शांतिकुंज देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिवार चयनित दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएगा। गुजराज में सूरत के रहने वाले सिकंदर कुर्मा को चलने में काफी दिक्कत है। सिकंदर ने प्रभु कालेज सूरत से बीसीए 78 प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण किया। आर्थिक तंगी की वजह से सिकंदर एमसीए की पढ़ाई नहीं कर सके। उनकी पढ़ाई की लगन देख प्रतिकुलपति ने उसे देसंविवि से एमसीए करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शांतिकुंज देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिवार उनकी पढ़ाई का खर्च उठाएगा। हेमांगिनी बेन के प्रयास से यहां के कई दिव्यांग छात्र-छात्राओं ने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में प्रावीण्य सूची में अपना स्थान बनाया है। अब तक वे करीब तीन हजार दिव्यांग बच्चों को पढ़ा चुकी हैं। इनमें कई दिव्यांग बच्चे चिकित्सा, संगीत, शिक्षा और व्यवसाय के क्षेत्र में सेवा कर रहे हैं।
तीन दिवसीय समारोह के दूसरे दिन बुधवार को दिल्ली, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश के सैकड़ों छात्र-छात्राएं शामिल हुए।