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अब मेला अस्पताल में कीडनी रोगियों को मिलने लगेगी डायलिसिस सुविधा ..

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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मेला अस्पताल में फरवरी के प्रथम सप्ताह से डायलिसिस यूनिट का लाभ मरीजों को मिलने लगेगा। यूनिट स्थापित करने के लिए अस्पताल में सिविल काम चल रहा है। यूनिट के लगने से किडनी के रोगियों की डायलिसिस हरिद्वार में ही हो सकेगी। अभी तक किडनी के मरीजों को देहरादून या अन्य प्रदेशों में जाना पड़ता था।
केंद्र सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस यूनिट लगाने को प्रक्रिया शुरू कराई गई थी। इसके तहत प्रदेश के चिकित्सा महानिदेशालय कार्यालय की ओर से हरिद्वार में मेला अस्पताल को चुना गया था। डेढ़ साल से यूनिट लगाने की चल रही प्रक्रिया में अब मेला अस्पताल में काम शुरू हो गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि डायलिसिस यूनिट लगने से रोगियों को निजी अस्पतालों में संबंधित रोग के लिए महंगे दामों से काफी राहत मिल जाएगी। अभी तक निजी अस्पतालों में एक बार डायलिसिस कराने में 15 से 20 हजार रुपये तक का खर्च आता है। वहीं हरिद्वार शहर में डायलिसिस यूनिट की सुविधा निजी अस्पतालों में भी कहीं नहीं है। इससे रोगियों को डायलिसिस के लिए देहरादून, चंडीगढ़, मेरठ या दिल्ली जाना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में केवल देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध है।
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यह होता है डायलिसिस का काम
डायलिसिस खून साफ करने की एक कृत्रिम विधि है। इस प्रक्रिया को तब अपनाया जाता है। जब किडनी या गुर्दा की कार्य क्षमता कमजोर हो जाती है यानी वो सही ढंग से काम नहीं कर सकती है। ऐसे में विषैले पदार्थ शरीर से बाहर नहीं निकलते। इसके कारण क्रिएटिनिन और यूरिया जैसे पदार्थ की अधिकता होने से मरीज को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में मशीनों की सहायता से खून को साफ किया जाता है। अधिक समय से डायबिटीज हो या फिर उच्च रक्तचाप हो तो तब डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है।
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मेला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट लगाने के लिए सिविल कार्य जारी है। उम्मीद जतायी जा रही है कि फरवरी के प्रथम सप्ताह में डायलिसिस यूनिट का लाभ रोगियों को मिलने लगेगा।
डा. प्रेमलाल, सीएमओ हरिद्वार।
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