हरिद्वार। नगर निगम क्षेत्र के लगभग चार हजार भवन स्वामियों ने स्वैच्छिक करारोपण के फार्म लेकर तीन साल बाद भी भरकर जमा नहीं किए हैं। अब नगर निगम ऐसे भवन स्वामियों को कर निर्धारण करके बिल भेजेगा।
स्वैच्छिक करारोपण योजना में भवन स्वामियों को अपना भवन कर स्वयं निर्धारित कर जमा कराना था, लेकिन बड़े रसूखदार भवन स्वामियों ने नगर निगम से फार्म लेकर वापस नहीं किए। जिससे नगर निगम को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्वैच्छिक करारोपण नियमावली के मुताबिक स्वकर निर्धारण न करने वाले भवन स्वामियों के भवन कर का निर्धारण नगर निगम का कर एवं राजस्व विभाग की ओर से किए जाने का प्रावधान है। नगर निगम अब ऐसे भवन स्वामियों की खबर लेने वाला है। भवन कर नहीं देने वाले भवन स्वामियों के विरुद्ध आरसी भी काटे जाने का प्रावधान है। नगर आयुक्त डा. ललित नारायण मिश्रा का कहना है कि 2015 में स्वैच्छिक कर निर्धारण फार्म लेने के बाद जमा नहीं करने वाले भवन स्वामियों से ब्याज सहित वसूली की कार्रवाई की जाएगी।
----------------
23 हजार भवनों का डाटा एंट्री हो चुका है
नगर निगम ने भवन कर को ऑनलाइन करने में भी तेजी से काम शुरू किया है। लगभग 34 हजार में से 23 हजार भवन करदाताओं का डाटा एंट्री किया जा चुका है। कंप्यूटर से भवन कर की बिलिंग का काम भी शुरू हो चुका है। धन संग्रहकर्ता कंप्यूटराइज बिलों का वितरण और वसूली में जुट गए हैं। वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में लगभग तीन करोड़ की वसूली ही की जा सकी है। जबकि पिछले वर्ष भवन कर ही वसूली पांच करोड़ को पार कर चुकी थी। कम वसूली का मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि नगर निगम का अधिकतर स्टाफ एक महीने से हाईकोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण चिह्नित करने व हटाने के अभियान में लगा है। कर एवं राजस्व अधीक्षक रमेश रावत ने बताया कि नगर आयुक्त ने सभी कर निरीक्षकों व धन संग्रहकर्ताओं को बिलों के वितरण व वसूली में जुटने का निर्देश दिया है।