सिविल जज (सीनियर डिविजन) दीपाली शर्मा के घर से मुक्त कराई गई किशोरी के माता-पिता को अब साबित करना होगा कि वे ही उसके असली माता-पिता हैं। बाल कल्याण समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि किशोरी को उसके अभिभावक को सौंपने से उसके फिर से गलत हाथों में पड़ने की आशंका है। इसके अलावा, किशोरी की उसके माता-पिता से मुलाकात कराए जाने पर विचार किया जा सकता है। बाल कल्याण समिति ने नैनीताल के डीएम-एसएसपी को माता-पिता की जांच के लिए निर्देशित किया है। मुलाकात को लेकर सुनवाई के लिए पांच फरवरी की तारीख नियत की गई है।
बृहस्पतिवार शाम जारी बाल कल्याण समिति के आदेश में यह लिखा है कि किशोरी के माता-पिता समिति के समक्ष पेश हुए। उन्होंने पढ़ाई के मकसद से किशोरी को महिला जज को परवरिश के लिए सौंपने की बात कही है। यह भी कहा कि बेटी को चोट अमरूद के पेड़ से गिरने से लगी है। ये भी कहा है कि उनकी बेटी की पढ़ाई का जिम्मा भी महिला जज उठा रही हैं।
माता-पिता के तर्क सुनने के बाद समिति ने टिप्पणी की है कि कानूनन परवरिश के लिए बेटी को किसी को सौंपने का कोई प्रावधान नहीं है। माता-पिता की ओर से प्रस्तुत राशन कार्ड में भी बेटी का नाम नहीं होने और आधार कार्ड न होने पर भी सवाल उठाया गया।
समिति के विधि सह परिवीक्षा अधिकारी अशोक शर्मा ने कहा है कि किशोरी को उसके कथित माता-पिता के सुपुर्द करने से उसके फिर से गलत हाथों में पड़ने की आशंका है। यदि किशोरी के माता-पिता उचित प्रमाण देते हैं तो उनकी मुलाकात किशोरी से कराए जाने पर विचार किया जा सकता है।