हरिद्वार। यूपी के माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी के कत्ल के बाद कुख्यात सुनील राठी के गुर्गे भूमिगत हो गए हैं। गैंगवार की आशंका के मद्देनजर एसटीएफ, सीआईयू और स्थानीय पुलिस गुर्गों की खोजबीन में जुटी है लेकिन कई का अता पता नहीं चल रहा है। ये गुर्गे अपने आका राठी के नाम पर वसूली अभियान चलाते आए हैं।
वेस्ट यूपी की बागपत जेल में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद सबसे अधिक बेचैनी का माहौल हरिद्वार जनपद में है। इसकी प्रमुख वजह डॉन का कत्ल करने वाले कुख्यात सुनील राठी की कार्यस्थली हरिद्वार जिला होना है। यहां राठी के गुर्गों की बड़ी फौज है और यही फौज रंगदारी के धंधे की कमान संभालती है।
मुन्ना के कत्ल के बाद से फौज के कई ‘सिपाही’ गायब चल रहे हैं। इन सभी पर एसटीएफ, सीआईयू और स्थानीय पुलिस की निगाहें गढ़ी हुई हैं। उत्तराखंड पुलिस अब हर गुर्गे की थाह ले रही है, वो कहां है और क्या कर रहा है। राठी के नेटवर्क में अब भी जुड़ा है या नहीं वगैरह वगैरह। पुलिस महकमा यह एक्सरसाइज इसलिए कर रहा है कि कही यूपी में हुए कत्ल का असर जनपद में गैंगवार के तौर पर देखने को न मिले।
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करोड़ों की भूमि को लेकर खेल शुरू
हरिद्वार। कुख्यात जीवा और राठी के बीच अदावत तय मानी जा रही है। इसी मौके का फायदा उठाकर कुछ रसूखदार हाईवे से सटी करोड़ों की विवादित भूमि के खेल को लेकर सक्रिय हो गए हैं। इस भूमि पर एक वक्त पर कुख्यात सुशील मूंछ का दावा था। पिछले कुछ वर्षों से जीवा इस भूमि को लेकर सक्रिय है। भूमि पर स्वामित्व का दावा कर रहे प्रॉपर्टी डीलर सुभाष सैनी पर एक बार कातिलाना हमला कथित तौर से जीवा के इशारे पर हो चुका है। एक बार हुए हमले में सैनी की बजाय कंबल व्यवसायी अमित दीक्षित उर्फ गोल्डी की जान चली गई। एक होटल व्यवसायी अब एक गैंस एजेंसी स्वामी की मदद से इस भूमि पर कब्जे की कोशिश में जुटा है। चर्चा है कि इन्होंने भी यूपी के एक प्रभावी गुट से हाथ मिलाया है।