कौशल सिखौला
हरिद्वार।
सीमा पर भले कितना तनाव हो, पर चीन की जिनपिंग सरकार ने अपने देश में बढ़ रहे बुढ़ापे और आलस्य का इलाज रामदेव योग से करने का फैसला किया है। इसके लिए चीन से 20 सदस्यों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पतंजलि में रहकर समूचे प्रतिष्ठान का दौरा किया। चीन के उद्योगपति पतंजलि संस्थान जैसे उद्योग अपने देश के कईं नगरों में खड़ा करना चाहते है।
पांच दुभाषियों के साथ चीन का 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बाबा रामदेव स्थापित तमाम उद्योगों, योगग्राम और ऋषिग्राम में चल रही गतिविधियों का अध्ययन किया। प्रतिनिधियों में स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के साथ गहन मंत्रणा की।
पतंजलि के विश्वस्तरीय अनुसंधान केंद्र में योग, प्रणायाम और आयुर्वेद पर किए गए क्लीनिकल परीक्षणों की रिपोर्ट देखकर यह दल हैरान रह गया। प्रयोगों के माध्यम से प्रतिनिधियों को दिखाया गया कि योग ने किस प्रकार असाध्य रोगों का इलाज किया है। परीक्षणों की रिपोर्ट दल को सौंपी गई। बढ़ती उम्र के साथ आने वाले रोगों को योग के माध्यम से ठीक होता देख दल को उम्मीद है कि योग उनके देश में भी थकान और बुढ़ापे का इलाज करेगा। यह दल चाहता है कि स्वामी रामदेव का प्रतिष्ठान चीन आकर तीन बड़े शहरों में पतंजलि के तीन मॉडल पहले चरण में खड़ा करें।
योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि चीन में करोड़ों लोग मधुमेह, कैंसर, ब्लडप्रेशर जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं। चीनी दल इस बात से भी चिंतित है कि वहां तेजी से बुढ़ापा बढ़ रहा है। इसके लिए चीन ने पूरी दुनिया में प्रचलित प्राकृतिक उपचारों की तलाश और अध्ययन शुरू किया। पाया कि भारत के योग और आयुर्वेद सबसे बेहतर और सस्ता इलाज उपलब्ध कराते हैं। इसके लिए चीन के उद्योगपति बड़े उद्योग स्थापित करने के लिए तैयार हैं। आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि प्रतिनिधिमंडली ने आग्रह किया है कि रामदेव और बालकृष्ण स्वयं चीन आकर वहां के उद्योगपतियों के साथ आयुर्वेद के उद्योग खड़े करें। शहर-शहर भारत की तर्ज पर योग की कक्षाएं शुरू की जाएं। आचार्य ने बताया कि शीघ्र ही पतंजलि से एक दल वार्ता के लिए चीन जाएगा।