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जीवन के कष्टों का संहार करता है अनुष्ठान: डॉ चिन्मय पंड्या

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि अनुष्ठान जीवन के कष्टों का संहार करता है। अनुष्ठान साधना भौतिक जीवन से लेकर पारलौकिक जीवन को भी सुधारने में सहायक है। साधना काल में प्रयोग होने वाला गायत्री महामंत्र में सर्वे भवन्तु सुखिन: का भाव समाहित है। इस महामंत्र के सामूहिक जप से वातावरण में ऐसी ऊर्जा उत्पन्न होती है, जिससे संपूर्ण पर्यावरण, जीव जगत में सकारात्मक परिवर्तन होने लगता है।
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वे शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयोजित सत्संग में ‘मंत्र शक्ति का प्रभाव और उसका ज्ञान विज्ञान’ विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इन दिनों ज्योतिषीय, खगोलीय व पर्यावरण आदि की दृष्टि से जो ऊर्जा वातावरण में उत्पन्न होती है जिसे साधना अनुष्ठान के माध्यम से ही अवशोषित कर सकते हैं और यही ऊर्जा साधक को सफलता की उच्चतम स्तर पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रतिकुलपति ने प्राचीनकाल से लेकर अब तक के विभिन्न उदाहरणों संस्मरणों का जिक्र करते हुए इस पर विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय, शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्त्ता सहित रसिया, कनाडा, युक्रेन, बेलारुस, अमेरिका, यूके तथा देश भर से आए गायत्री साधक उपस्थित रहे।
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