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ध्यात्मिक उन्नति से मिलती है शांति और संतुष्टि: डॉ. पण्ड्या

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि अध्यात्म का विज्ञान से गहरा संबंध है। अध्यात्म के सूत्र विज्ञान के सभी सूत्रों को जोड़ते हैं। अध्यात्म चेतना के परिष्कार और चित्त की शुद्धि का नाम है। जिस किसी के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति होती है उन्हें शांति और संतुष्टि की प्राप्ति होती है।
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वे देव संस्कृति विश्वविद्यालय के मृत्युंजय सभागार में आयोजित विशेष व्याख्यान में उपस्थित युवाओं का मार्गदर्शन कर रहे थे। कुलाधिपति ने कहा कि अपने भीतर के चेतन तत्व को जानना और उसके दर्शन करना सच्चा अध्यात्म है। जो सिद्धांत विज्ञान में लागू होता है वही अध्यात्म में भी लागू होता है। संसार में विज्ञान के विकास से वैभव एवं विभूति बढ़ती है तो वहीं अध्यात्म के विकास से जीवन में सुख शांति एवं सौहार्द बढ़ता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और परमात्मा की तरह विज्ञान और अध्यात्म के बीच भी गहरा संबंध है। यह संबंध जितना सुदृढ़ और स्थिर होगा, मानवीय जीवन उतना ही सुखी, शांत और विकसित होता चला जाएगा। उन्होंने गायत्री परिवार के संस्थापक श्रीराम शर्मा आचार्य के वचनों को याद करते हुए कहा कि अध्यात्म जीवन का शीर्षासन है। अध्यात्म अहंकार के विपरीत है तथा ध्यान अध्यात्म की उच्च कोटि है। अध्यात्म वह कर्म सिद्धांत है, जिसमें मनुष्य अपने कर्मों द्वारा अपने भविष्य का निर्माण करता है। आत्मा का परमात्मा के संबंध में चिंतन मनन करना अध्यात्म है। इस अवसर पर कुलपति शरद पारधी, प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या, कुलसचिव बलदाऊ देवांगन, शांतिकुंज परिसर में रीने वाले कई साधक और अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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