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अच्छी कथा समाज और पाठक का मूल केन्द्र

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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हिमाचल विश्वविद्यालय शिमला के पूर्व कुलपति प्रो. एसडी शर्मा ने कहा कि कथा छोटी जरूर हो मगर उसका भाव अच्छा होना चाहिए। अच्छी कथा समाज और पाठक का मूल केंद्र बनती है। कथा से साहित्य का जन्म होता है और साहित्य से रस का जन्म होता है। इसीलिए कथा के मूल केन्द्र में रस होना चाहिए जिससे साहित्य प्रेमी उसका रसानुभूति ले सकें।
गुरुकुल कांगड़ी विवि के अंग्रेजी विभाग और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में मुख्य वक्ता प्रो. एसडी शर्मा ने कहा कि साहित्य समाज को विकास और ज्ञान की ओर ले जाता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विवि कुलपति प्रो. विनोद कुमार शर्मा ने हुए कहा कि वेद उपनिषद् और पुराणों में कथा के संदर्भ में बहुत से दृष्टांत देखने को मिलते हैं। ऋग्वेद में उत्कृष्ट नमूने उपलब्ध हैं।
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गुरुकुल विवि के पूर्व आचार्य एवं उप कुलपति प्रो. वेद प्रकाश शास्त्री ने कहा कि कथा साहित्य से जुड़ा है। कथा में कोई चमत्कार नहीं है, कथा लौकिक होती है। कवि साहित्यिक रूपी वाणी से कथा का साहित्यिक सृजन करता है। रस में संवेदनाएं होती है, रस का आनंद वहीं व्यक्ति उठा सकता है जो सह हृदय होता है। विश्वविद्यालय, सागर विश्वविद्यालय के मध्य प्रदेश के पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. एके अवस्थी ने नीति और धर्म पर बोलते हुए कहा कि सत्य अहिंसा और नीति महात्मा गांधी द्वारा दिए हुए मंत्र हैं। सेमिनार के संयुक्त आयोजक प्रो. एमआर वर्मा एवं प्रो. श्रवण कुमार शर्मा ने कहा कि साहित्य का जन्म दुख की पीड़ा से होता है। इस अवसर पर प्रो. अम्बुज कुमार, प्रो. हेमलता, डॉ. मुदिता अग्निहोत्री, डॉ. करुणा शर्मा, डॉ. अपर्णा वर्मा, डॉ. आशिमा श्रवण, डॉ. मोनिका गुप्ता, डॉ. सीमा मलिक, डॉ. समीना खान, डॉ. विनोद मिश्रा, प्रो. रश्मि अत्री, राजीव त्यागी, डॉ. पंकज कौशिक आदि मौजूद थे।
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