अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
स्वयं कार्यदायी संस्था होने के बाद भी नगर निगम के बाद अब हरिद्वार विकास प्राधिकरण ने भी निर्माण कार्य ग्रामीण निर्र्माण विभाग (आरईएस) को सौंपे हैं। सड़क, भवन निर्माण, चौराहों का विकास एवं आवासीय योजना की डीपीआर बनाने तक काम आएईएस से कराने जा रहेहैं। इसका कारण एचआरएीए मेन पावर की कमी बता रहा है।
प्राधिकरण ने शहर के छह चौराहों के विकास तथा सुंदरीकरण का कार्य भी ग्रामीण निर्माण विभाग को दे दिया है। इसके लिए 40 लाख रुपये भी अवमुक्त कर दिए गए हैं। नगर निगम सड़क निर्माण के स्वीकृत 5 करोड़ 26 लाख रुपये आरईएस को देने जा रहा है। प्राधिकरण ने नगर निगम कार्यालय परिसर को ध्वस्त कर उसकी आवासीय एवं व्यवसायिक कांपलेक्स निर्माण योजना की डीपीआर भी आरईएस से बनवाई है। नगर निगम के लिए नए बहुमंजिले कार्यालय भवन निर्माण भी आरईएस ही कर रहा है। नगर निगम वर्तमान जर्जर कार्यालय भवनों की मरम्मत का काम भी आरईएस से ही करा रहा है।
हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण ने शहर के छह चौराहों के विकास, लाइटिंग तथा सुंदरीकरण का कार्य ग्रामीण निर्माण विभाग से कराने का निर्णय लिया है। इन चौराहों के सुंदरीकरण पर करीब 40 लाख खर्च होने का अनुमान है। प्राधिकरण के पास मेनपावर की कमी होने पर आरईएस को काम दिया गया है।
- बंशीधर तिवारी सचिव एचआरडीए
तीन करोड़ के साइंस पार्क पर भी नजर
हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण को सिडकुल से औद्योगिक क्षेत्र हरिद्वार में साइंस पार्क बनाने के लिए 45 बीघा भूमि मिली है। लगभग तीन करोड़ रुपये की इस योजना पर ग्रामीण निर्माण विभाग(आरईएस) की नजर है। इसका डिजायन तैयार किया जा रहा है। सचिव बंशीधर तिवारी ने बताया कि अभी यह निर्णय नहीं लिया गया है कि साइंस पार्क का निर्माण प्राधिकरण स्वयं कराएगा या फिर किसी दूसरी एजेंसी से कराएगा। उन्होंने बताया कि साइंस पार्क हरिद्वार में आकर्षण का केंद्र बनेगा। देश-विदेश से गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं तथा बच्चों को साइंस पार्क अपनी ओर आकर्षित करेगा। प्राधिकरण की योगा पार्क तथा बाल सुधार गृह बनाने की भी योजना है।