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...बंदीरक्षक उतरे विद्रोह पर, जेल की सुरक्षा खतरे में

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हरिद्वार। हरिद्वार जेल एक बार फिर से सुर्खियों में है। इस बार जेल की सुरक्षा की कमान संभालने वाले बंदी रक्षकों ने ही जेल में चल रहे अफसरों और कुख्यातों के गठजोड़ की पोल खोलकर रख दी है। बंदी रक्षकों ने जो बयां किया वह यदि हकीकत है तो जेल की सुरक्षा ही मौजूदा समय में खतरे में है। हालांकि जेल के अफसर अपने दामन को पूरी तरह से पाक साफ बता रहे हैं। लेकिन कुछ न कुछ वजह तो जरूर रही होगी जो जेल में अधिकारियों के खिलाफ विद्रोह जैसे हालात पैदा हो गए।
जेल में क्या खेल चल रहा है, इसकी हकीकत उच्च स्तरीय जांच में सामने आ सकती है। हरिद्वार जेल की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले बंदी रक्षकों के अंदर विद्रोह की यह चिंगारी कई दिन से सुलग रही होगी। अपने ही अधिकारियों के दामन पर बंदी रक्षक कई तरह के गंभीर आरोप मढ़ रहे हैं। ये युवा चंद माह पूर्व ही बंदी रक्षक के तौर पर भर्ती हुए थे। बंदीरक्षकों की मुखालफत जेल के संचालन की नींव हिलने जैसी है, क्योंकि जेल की व्यवस्था इन्हीं के ही कंधों पर होती है। वे अफसरों पर सीधे सीधे कुख्यातों से मिले होने के आरोप जड़ रहे हैं। बंदी रक्षकों ने यह भी आरोप जड़े कि सुविधा शुल्क मिलने पर ऐशो आराम उपलब्ध कराया जाता है। इसका मतलब यह है कि जेल में सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा। जेल पहली बार सुर्खियों में नहीं आई है बल्कि पिछले वर्ष जेल के अंदर दो कैदियों से मोबाइल फोन मिले थे। जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक कैदी ने अपना वीडियो जेल से ही वायरल कर दिया था। उसकी उच्च स्तरीय जांच भी हुई थी लेकिन चार बंदी रक्षकों को ही दोषी मानते हए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
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सीएम के पास है जेल महकमा
हरिद्वार। ये आलम तब है कि जब जेल महकमा खुद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत संभाल रहे हैं। यही नहीं अब जेल की कमान वैसे तो पूरी तरह से आईपीएस अधिकारी के हाथ में है लेकिन जेलों की व्यवस्था जस की तस है।
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जेल अधिकारियों पर आरोप लगा रहे बंदी रक्षकों का तबादला किया जाएगा और पूरे मामले की जांच कराई जा रही है।
- पीवीके प्रसाद, आईजी जेल
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