अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर निगम कार्यालय में भू- संपत्तियों के दस्तावेज तो हैं लेकिन अफसरों को यह जानकारी नहीं है कि आखिरकार ये भ-ूसंपतियां कहां हैं। ऐसा ही एक मामला भूपतवाला का सामने आया है। पहले हरिद्वार सहारनपुर जिले का अंग होता था। ऐसे में सहारनपुर से 68 साल पुराना दस्तावेज मिलने से पता लगा कि नगर निगम की भूपतवाला में दो बीघा जमीन है। यह जमीन कहां है इस बारे में निगम के अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं है।
नगर निगम के पार्षद सतेंद्र वर्मा की मानें तो नगर निगम ने वर्ष 1949 में भूपतवाला मेें 220 रुपये में दो बीघा जमीन खरीदी थी। अब यह जमीन कहां पर है इसकी जानकारी नगर निगम के किसी भी अफसर को नहीं है। पार्षद सतेंद्र वर्मा ने जब इस मामले में निगम के अफसरों से जानकारी मांगी तो उन्होंने कहा कि भूपतवाला की इस जमीन की बाबत उनके पास कोई दस्तावेज ही नहीं है। तब पार्षद सतेंद्र वर्मा सहारनपुर गए और कलेक्ट्रेट से दस्तावेज निकाले। इसमें भूपतवाला में वर्ष 1949 में भूपतवाला में जमीन खरीदने का उल्लेख है। पार्षद वर्मा का कहना है कि इस बेशकीमती जमीन पर लोगों ने कब्जा कर आशियाना बना लिया है। इस पूरे प्रकरण में नगर निगम के अफसरों की भूमिका संदेह के घेरे में है। पार्षद वर्मा का कहना है कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट में कागजात निकलवाने उनके साथ नगर निगम राजस्व विभाग के अफसर भी गए थे। उन अफसरों के सामने कागजात निकलवाए गए हैं। उर्दू में लिखे दस्तावेजों को अनुवाद कराया गया है। जिसमें जमीन की खरीद फरोख्त का पूरा उल्लेख है।
पार्षद वर्मा ने नगर आयुक्त नितिन भदौरिया से मांग की है कि वे नगर निगम की इस बेशकीमती जमीन को कब्जे में लें ताकि निगम की करोड़ों की संपत्ति बचाई जा सके।