हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विवि के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल ने कहा कि शिक्षा का अर्थ मात्र शिक्षित होना नहीं है बल्कि शिक्षा जीवन जीने की संपूर्ण कला और सामाजिक परिवर्तन की कुंजी भी है। दुनिया के सभी विचारकों ने शिक्षा को एक ऐसा सशक्त माध्यम माना है जिसके दम पर पूरी दुनिया को बदला जा सकता है। राज्यपाल ने संस्कृत और देवभूमि के बीच गहरा नाता बताया।
सोमवार को उत्तराखंड संस्कृत विवि के सातवें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने विवि के 26 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल और सात छात्र-छात्राओं को पीएचडी की उपाधि देकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने संस्कृत की महत्ता बताते हुए कहा कि संस्कृत भाषा भारतीय संस्कृति और विचार परंपरा का माध्यम रही है। ऋग्वेद काल से लेकर आज तक संस्कृत भाषा में विविध साहित्य की रचना की गई है। दुनिया की प्राचीनतम भाषाओं में संस्कृत का उच्च स्थान है। संस्कृत विश्वविद्यालयों को आधुनिक गुरुकुल बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि इन विवि के छात्र शिक्षक किसी न किसी रूप में प्राचीन परंपराओं के आधुनिक रूप हैं। राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत और देवभूमि का गहरा नाता है। संस्कृत विवि का दायित्व है कि देवभूमि और देववाणी की गरिमा को बनाए रखने में छात्रों को संस्कृत के परंपरागत प्राचीन ग्रंथों के गंभीर अध्ययन के लिए प्रेेरित करते हुए आधुनिक समाज का पथ प्रदर्शक बनने पर ध्यान केंद्रित करें। कहा कि देवभूमि में स्थापित संस्कृत विवि ज्ञान का ऐसा उत्कृष्ट केंद्र बने जैसे कभी तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय थे। उत्तराखंड में संस्कृत को दूसरी राजभाषा बनाया गया है। इस लिहाज से संस्कृत विश्वविद्यालय और इससे जुड़ी अन्य संस्थाओं की भूमिका और बढ़ जाती है।
दीक्षांत समारोह में कुलपति प्रो. पीयूष कांत दीक्षित ने कहा कि छात्र-छात्राएं इस शिक्षा का प्रयोग संस्कृत विवि की गरिमा बढ़ाने और राष्ट्र निर्माण में करेंगे। अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. ओमप्रकाश पांडेय ने कहा कि वर्तमान युग विज्ञान का है। समग्र विवि विज्ञानोन्मुख है। वर्तमान में सभी अध्ययनों का दृष्टिकोण वैज्ञानिक होना हमारी आवश्यकता है। डॉ. पांडे ने कहा कि दीक्षांत समारोह का उल्लेख उपनिषदों में मिलता है। कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच संचालन डॉ. शैलेश तिवाडी ने किया। इस अवसर पर गुरुकुल कांगड़ी विवि के कुलपति डॉ. सुरेंद्र कुमार, कार्य परिषद के सदस्य आरडी आनंद, बी सुब्बा रावए डॉ. अनिल शुक्ल, महेश जोशी, डॉ. मनोज किशोर पंत, डॉ. राकेश कुमार सिंह, डॉ. दमादम परंगाई, डॉ. रामरत्न खंडेलवाल, डॉ. रतनलाल, डॉ. सुरेश त्यागी, डॉ. अरविंद नारायण मिश्र आदि उपस्थित रहे।
इन्हें मिला स्वर्ण पदक व पीएचडी की उपाधि
दीक्षांत समारेाह में मुख्य अतिथि डॉ. पाल ने दिव्यांशु आर्य, भुवन पौड़ेल, शशांक पंचभैया, मृणालिनी कौशिक, गीतांजली, हर्षपति धस्माना, प्रवीन प्रसाद, रामप्रताप यादव, सुषमा, रविंद दास, प्रियदर्शनी, रियाजुल, आरती सैनी, हिमानी डंगवाल, नीतू शर्मा, विक्रम सिंह रावत, नितिन कुमार, रितु , शिखा शुक्ला, दीप्ति रानी, आरती भंडारी, विक्रम सिंह सिद्धू, शिवम शुक्ला, अमरदेव, मोनिका बंसल, ललित शर्मा को गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। इसके साथ ही चंद्रमणि, रोहित चौबे, प्रमोद कुमार, अतुल कुमार, गणेश भागवत, अजय कुमार पोखरियाल, रामकृष्ण पोखरियाल को पीएचडी की उपाधि प्रदान की।
एक छात्र को नहीं दी पीएचडी उपाधि
विवि के सातवें दीक्षांत समारोह में आठ छात्र-छात्राओं को पीएचडी की उपाधि दी जानी थी, लेकिन सात छात्रों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की। सूत्रों के अनुसार छात्र की राज्यभवन को मिली शिकायत पर विवि ने मामले की जांच होने तक छात्र को पीएचडी की उपाधि प्रदान करने पर रोक दिया है।
2281 छात्र-छात्राओं को मिली डिग्रियां
दीक्षांत में आचार्य विषयों के 474, शास्त्री बीए के 602, समस्त व्यवसायिक पाठ्यक्रमों के 908, बीएड के 40 और समस्त सर्टिफिकेट प्रमाणपत्रों के 257 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गई।