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भारतीय संस्कृति में समाहित है वसुधैव कुटुंबकम की भावना: डॉ. पंड्या

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा से जुड़े जिला समन्वयकों की दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सोमवार को समापन हो गया। संगोष्ठी में यूपी, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब सहित 18 राज्यों के तीन सौ पचास जिलों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। संगोष्ठी में कहा गया कि हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुबकम की है।
संगोष्ठी में शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्ता वीरेश्वर उपाध्याय ने कहा कि कठिन कार्य पर ऊंची मानसिकता वाले कहते हैं कि यह प्रतिभा आकलन का अवसर है, जबकि कमजोर मानसिकता वाले इससक बचने का उपाय ढूंढते हैं। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या ने कहा कि भारत ने संस्कृति रूपी जीवन शैली पारिवारिकता के रूप में विश्व को अनुदान है। उन्होंने कहा कि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने भारतीय संस्कृति की कुछ मान्यताओं पर बड़ी गहराई से प्रकाश डाला है व प्रत्येक का तथ्य सम्मत विवेचन शास्त्रों व विज्ञान की सम्मति के साथ प्रस्तुत किया है।
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एचपी सिंह ने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के आगामी वर्ष के नियमों एवं कार्यक्रम निर्धारण पर विस्तृत जानकारी दी। भासंज्ञाप के प्रभारी प्रदीप दीक्षित ने बताया कि इस संगोष्ठी में भासंज्ञाप से जुड़े देश के 18 राज्यों के 350 जिलों के समन्वयकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान आगामी वर्ष में होने वाली परीक्षा के निर्धारण एवं भावी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में देश के 18 राज्यों हुए भासंज्ञाप में 31 लाख छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इसमें सबसे ज्यादा 115321 विद्यार्थियों की भागीदारी कराने वाले बांसवाड़ा राजस्थान सहित प्रथम दस जिलों के जिला प्रतिनिधियों को विशेष स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया।
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