उत्तराखंड का धावक गुरमीत अपने उपलब्धियों के एक और नए कारवां के लिए निकलने जा रहा है। इस दफा गुरमीत के सामने लक्ष्य जीत का और जमीन मॉस्को की होगी।
ओलंपिक में 33वें स्थान पर रहे बाजपुर के गांव बन्नाखेड़ा निवासी गुरमीत सिंह गिल मास्को में होने वाली वर्ल्ड एथलेटिक चैंपियनशिप में भाग लेंगे। गिल की निगाह इस चैंपियनशिप को जीतने की है। नौ दिवसीय एथलेटिक चैंपियनशिप 10 से 18 अगस्त तक होगी।
टीम के साथ गिल मास्को के लिए रवाना
गिल ने बंगलूरू से फोन पर अमर उजाला को बताया कि मास्को में होने वाली वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए इंडिया की टीम को बंगलूरू स्थित राष्ट्रीय कैंप में खिलाड़ियों की प्रेक्टिस चल रही है। सात अगस्त को खिलाड़ियों की टीम के साथ गिल मास्को के लिए रवाना होंगे।
उनके बडे़ भाई पलविंदर सिंह गिल ने बताया कि गुरमीत की बचपन से ही स्पोर्ट्स में विशेष रुचि थी। वर्ष 2000 में जूनियर नेशनल लेबल जीत हासिल की, जिस पर पंजाब पुलिस ने उसे पुलिस में भर्ती कर लिया।
इसके बाद गुरमीत की साढे़ तीन साल पहले मुरादाबाद रेलवे में बुकिंग लिपिक के रूप में नियुक्ति हुई है। वर्तमान में वह रेलवे की तरफ से बंगलूरू में कोचिंग कर रहे हैं।
परमजीत कौर बहुत खुश हैं
गुरमीत के ओलंपिक में खेलने सहित अन्य प्रतियोगिताओं में कई पदक जीतने पर उनकी माता परमजीत कौर बहुत खुश हैं। उन्हें विश्वास है कि गुरमीत मास्को से पदक लेकर लौटेगा।
गुरमीत की अब तक की उपलब्धियां
2000- पंजाब में जूनियर नेशनल लेबल
2001- बर्नेई में कोमेमोरिटिल मेडल
2004- एशिया जूनियर एथलेटिक चैंपियनशिप
2006- पंजाब पुलिस बेस्ट एथलेटिक
2007- आल इंडिया पुलिस गेम्स
2008- आल इंडिया पुलिस गेम्स
2009- इंटर स्टेट सीनियर एथलेटिक
2010- आल इंडिया रेलवे एथलेटिक चैंपियनशिप
2011- लैफ वर्ल्ड चैंपियनशिप
2012- ओलंपिक में 33वां स्थान