उत्तराखंड में आई आपदा के बाद अब बदरीनाथ धाम का रेस्क्यू ऑपरेशन अंतिम चरण में है। शासन-प्रशासन के सामने अब प्रभावितों को राहत सामग्री उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। दिन गुजरने के साथ ही गांवों में रसद संकट गहराने लग गया है।
राज्य के बाहर से राहत सामग्री के बड़े जखीरे गौचर, कर्णप्रयाग और गोपेश्वर के गोदामों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन सड़कें, पुल और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त होने से राहत सामग्री गांवों तक नहीं पहुंच पा रही है।
16/17 जून को आई आपदा के बाद जनपद के जोशीमठ, नारायणबगड़, देवाल और थराली विकास खंडों के करीब 12 गांवों का बाजारों और मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़कें, पुल, संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त होने और बदरीनाथ हाईवे बंद होने से पिंडर घाटी, पिनोला, गोविंदघाट, पांडुकेश्वर, लामबगड़, बेनाकुली, हनुमान चट्टी, नीती, कैलाशपुर और माणा गांव सहित अन्य सीमांत क्षेत्रों में रसद संकट गहरा गया है।
अलकनंदा घाटी के गांवों में तो हेलीकॉप्टरों से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है, लेकिन पिंडर घाटी के तीन प्रखंडों में अभी तक राहत सामग्री नहीं पहुंचाई जा सकी है। ग्रामीणों की आस टूटने लगी है। पिंडर घाटी के चौंड गांव निवासी मनमोहन चतुरा का कहना है कि शासन-प्रशासन द्वारा 13 दिन बीत जाने के बाद भी गांवों का स्थलीय निरीक्षण नहीं किया गया है। राहत सामग्री नहीं पहुंचने से 40 गांवों में भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। वहीं, अपरजिलाधिकारी संजय खेतवाल कहते हैं हेलीपैड न होने से हेलीकाप्टरों की भी मदद नहीं मिल पा रही।
मदद को लाए गए मिनरल वाटर से नहा रहे कर्मचारी
देश के लोग उत्तराखंड में राहत सामग्री भेज रहे लेकिन जिन पर बांटने की जिम्मेदारी है उनका हाल सुनिए वे अफसर-कर्मी मिनरल वाटर से नहा रहे हैं। स्थिति यह है कि जितनी राहत सामग्री आई है उससे कई गांव फिर से आबाद हो सकते हैं। संदेश कला सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था के अध्यक्ष संजय सिंह रावत केदारघाटी से लौट कर आए हैं।
उन्होंने बताया कि राहत सामग्री बांटने के पर्याप्त प्रबंध न किए जाने के कारण यह सामग्री जहां-तहां बर्बाद हो रही है। हर रोज दर्जनों ट्रक राहत सामग्री पहुंच रही है। लेकिन जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच रही। आलम यह है कि खाद्य पदार्थ, कपड़े, दूध के पाउच आदि के गुप्तकाशी, फाटा और सोनप्रयाग आदि जगहों पर ढेर लगे हुए हैं। उसे बांटने वाला कोई नहीं है।
रसद भरपूर, सप्लाई में हो रही परेशानी
रुद्रप्रयाग जिले में आई आपदा से निपटने के लिए हर कोई सहयोग कर रहा है। लगातार राहत सामग्री जिला पूर्ति विभाग को प्राप्त हो रही है। हालांकि पूर्ति विभाग के अधिकारिया का कहना है कि गोदाम से प्रत्येक दिन आपदाग्रस्त क्षेत्रों में रसद की सप्लाई की जा रही है, लेकिन आपदाग्रस्त दुर्गम क्षेत्रों में अभी भी राशन की सप्लाई नहीं हो पाई है।
वर्तमान में पूर्ति विभाग के गोदाम में 13 क्विंटल आटा, आठ क्विंटल चावल, साढ़े तीन क्विंटल दाल, 480 पैकेट (प्रत्येक पैकेट 40 किलो) मिक्स राशन, 395 पैकेट (प्रत्येक पैकेट 12 किलो) मिक्स राशन, 65 कट्टे आलू, 18 कट्टे प्याज, 17 कट्टे लौकी, 12 कट्टे कद्दू, तेल छह पैकेट, तीन टिन, दूध चार पेटी, कंबल 21 बंडल (प्रत्येक बंडल में 40 कंबल) उपलब्ध हैं। जबकि गुप्तकाशी गोदाम में अभी तक 80 क्विंटल चावल, 60 क्विंटल आटा, छह क्विंटल दाल उपलब्ध है।
कालीमठ घाटी के अंतर्गत अभी भी कुछ गांवो में रसद की सप्लाई नहीं हो पाई है। प्रधान ब्यूंखी पुष्पा देवी, दिलवर सिंह रावत ने बताया कि प्रशासन द्वारा चौमासी, कालीमठ, कोटमा में एअर ड्रापिंग से राशन पहुंचाई, लेकिन अभी तक ब्यूंखी, कुणजेठी में सप्लाई नहीं हो पाई है।
राहत सामग्री की हो रही बर्बादी
श्रीनगर में राहत सामग्री या तो बर्बाद हो रही है अथवा गैरजरूरतमंदों को दी जा रही है। कई स्थानों पर रास्तों की जानकारी न होने के कारण लोग रास्तों पर ही राहत सामग्री छोड़ कर जा रहे हैं। कुछ सामान किराना व्यापारियों के यहां ले जाने की सूचनाएं भी मिल रही हैं।
ग्रामीण रतन सिंह और दलबीर सिंह कहते हैं कि श्रीनगर से कलियासौड़ के बीच कुछ दिन पहले तक बच्चों में बिस्कुट, मैगी, ब्रेड, फ्रूटी आदि वस्तुएं लेने की होड़ लगी रही। बांटने वाले राहत सामग्री बच्चों को थमा रहे हैं। जिलाधिकारी चंद्रेश कुमार यादव ने बताया कि राहत सामग्री ला रही संस्थाएं स्वयं उसके लिए जिम्मेदार हैं।
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श्रीनगर और श्रीकोट के बीच मिले कपड़े
श्रीकोट और श्रीनगर के बीच सैकड़ों कपड़े यूं ही बिखरे पड़े हैं। बताया जा रहा है कि शुक्रवार देर शाम एक वाहन में कोई कपड़े लाया और नाले के समीप गिरा दिए। इससे पूर्व कपड़ों के गठ्ठर डालमिया धर्मशाला के गेट के समीप पड़े मिले थे।
गंगोरी-मनेरी से आगे नहीं पहुंच पा रही राहत
उत्तरकाशी। गंगा घाटी के दर्जनों गांव 16 - 17 जून की बाढ़ से अलग-थलग पड़े हैं। इन गांवों की सड़क, संपर्क तथा पुल बाढ़ में तबाह हो गए थे। आपदा पीड़ितों के लिए जिला मुख्यालय पर विभिन्न राज्यों से कई ट्रक राहत सामग्री पहुंची है। लेकिन यह राहत गंगोरी और मनेरी से आगे नहीं पहुंच पाई।
डिडसारी गांव के प्रधान विजय राणा, पवन डिमरी, हरि सिंह राणा, केशर सिंह राणा, रतन सिंह का कहना है गांव के कई परिवार भुखमरी की हालत में हैं। लेकिन प्रशासन इन्हें अनाज नहीं पहुंचा पाया है। कई अपात्र भी डिडसारी गांव का बताकर राहत ले रहे हैं। ग्रामीणों ने हेलीपैड बना रखा है लेकिन सरकार की ओर से इन्हें मदद नहीं मिल पा रही है।
डिडसारी गांव जिला मुख्यालय से ज्यादा दूर नहीं है। उपला टकनौर और असीगंगा घाटी सहित यमुना घाटी के दूरस्थ गांवों को भी राहत सामग्री का इंतजार है।
कर्णप्रयाग में स्टोर है सामग्री, बंटी नहीं
युवा कल्याण अधिकारी चमोली केएन गैरोला का कहना है कि सरकार से मिली राहत सामग्री को कर्णप्रयाग में स्टोर किया जा रहा है। प्राप्त राहत सामग्री के तहत आटा, दाल, जूस, तेल, चावल का वितरण किया जा रहा है। टेंट, कंबल और तिरपाल सहित अन्य सामग्रियों का वितरण शुरू नहीं किया गया है।
पात्र प्रभावितों को ही राहत सामग्री बांटी जा रही है। जनपद के प्रभावित क्षेत्रों में लिए राहत सामग्री का स्टोर कर्णप्रयाग में किया जा रहा है। मात्रा के हिसाब से वितरण किया जा रहा है। डीएम के निर्देश पर ही कार्रवाई की जा रही है।