एक मात्र छात्र के स्कूल से नाम कटाने से चंपावत का हल्दुवा प्राइमरी स्कूल भी बंद हो गया है। तीन सालों में यह तीसरा स्कूल है जहां छात्र न होने से स्कूल को बंद करना पड़ा।
स्कूल चलो अभियान के जरिए छात्र-छात्राओं को सरकारी प्राइमरी स्कूलों के लिए प्रेरित किया जा रहा है। मगर दूसरी तरफ आलम यह कि सरकारी प्राइमरी स्कूलों के बंद होने का सिलसिला थम नहीं रहा है। अप्रैल से शुरू नए शिक्षा सत्र में ये क्रम शुरू हो गया है। पाटी विकासखंड के हल्दुवा प्राथमिक विद्यालय में ताला लटक गया है।
पिछले शिक्षा सत्र में यहां सिर्फ एक छात्र था। भोजन माता बसंती का बेटा नीरज उपाध्याय ही यहां अकेला छात्र था। उसके यहां से निकलने के बाद अब यह स्कूल बंद हो गया है। स्कूल बंद होने से भोजन माता भी बेरोजगार हो गई है। जिले के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में 2011 में 20014 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थें। ये संख्या चार वर्ष में 4887 कम हो गई।
पिछले साल सरकारी स्कूलों के पांचवीं तक के 15127 छात्र-छात्राएं थे। मुफ्त शिक्षा के अलावा नि:शुल्क पुस्तकें, मध्याह्न भोजन योजना, नि:शुल्क यूनिफार्म आदि की सुविधा के बावजूद इस संख्या में गिरावट आना चिंताजनक है। इससे पहले खुनाड़ी, बमन्यूड़ा प्राथमिक विद्यालय भी बंद हो चुके हैं।
हल्दुवा प्राथमिक विद्यालय बंद हो गया है। यहां पढ़ने वाला इकलौता छात्र भी इस गांव का न होकर पास के दूसरे गांव का था। हल्दुवा गांव के ज्यादातर लोग दूसरी जगह बस चुके हैं। यहां कराई गई बाल गणना में भी कोई ऐसा बच्चा नहीं है, जो कहीं न कहीं स्कूल न जाता हो। हल्दुवा में तैनात शिक्षक को आदर्श स्कूल पोखरी में संबद्ध किया गया है।
- मनीष बिष्ट उप शिक्षाधिकारी, पाटी
बंद हो चुके स्कूल
खुनाड़ी, कोट जमराड़ी, सेलागाढ़, दियूली, खुरपाली, कोटला, झिरकुनी, भनार, पुरोला, गहतोड़ा, मध्यावली, हल्दुवा प्राथमिक स्कूल तथा बमन्यूड़ा जूनियर हाईस्कूल।