पिथौरागढ़ के कनालीछीना में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कनालीछीना में नियुक्त एकमात्र महिला डॉक्टर केंद्र में तैनात नहीं होकर दूसरे अस्पताल में तैनात हैं। महिला डॉक्टर के छह महीने से अस्पताल नहीं आने पर आक्रोशित लोगों ने जिला महिला अस्पताल में तालाबंदी की मांग की है।
पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख रमेश पांडे का कहना है कि क्षेत्र की 40 हजार आबादी के लिए बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के कई केश आते हैं। महिला डॉक्टर मौजूद नहीं होने से नर्स प्रसव कराती हैं। कहा कि अस्पताल में तैनात महिला डॉक्टर छह महीने से वेतन तो कनालीछीना से ले रही हैं, लेकिन सेवा जिला महिला चिकित्सालय में दे रही हैं।
लोगों का कहना है कि एकमात्र महिला डॉक्टर को अस्पताल से हटाकर क्षेत्र की महिलाओं के साथ अन्याय किया जा रहा है। अस्पताल में तीन नर्स तैनात हैं, जिनमें से एक नर्स डिलीवरी का कार्य करती हैं। ग्राम प्रधान संगठन की ब्लॉक अध्यक्ष जानकी उपाध्याय ने कहा कि एक सप्ताह के भीतर महिला डॉक्टर की अस्पताल में तैनाती नहीं हुई तो क्षेत्र की महिलाओं को साथ लेकर जिला महिला चिकित्सालय में तालाबंदी कर दी जाएगी।
उधर, स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर राजीव चंद्र भट्ट एक ओर कहते हैं कि कनालीछीना अस्पताल में काम नहीं है, जिला महिला अस्पताल में अधिक काम होने के कारण महिला डॉक्टर को पिथौरागढ़ भेजा गया है, दूसरी ओर कहते हैं कि पिछले वर्ष कनालीछीना अस्पताल में 96 डिलीवरी हुई। इस संबंध में कनालीछीना अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी अंजनी कुमार से पूछताछ करना चाहा, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
पांच कक्षाओं को पढ़ाने के लिए मात्र दो शिक्षक
मुनस्यारी तहसील के दुर्गम में स्थित राजकीय इंटर कॉलेज भैंसकोट में शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है। विद्यालय में छठी से दसवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए मात्र दो शिक्षक तैनात हैं। विकास संघर्ष समिति भैंसकोट के अध्यक्ष खड़क सिंह राठौर ने राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर शिक्षकों की तैनाती की मांग की है।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष ने कहा कि विद्यालय में छह से दसवीं कक्षा तक 117 बच्चे अध्ययनरत हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए मात्र दो शिक्षक तैनात हैं। उनमें भी एक प्रभारी प्रधानाचार्य तो दूसरे व्यायाम शिक्षक हैं। विद्यार्थियों को हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों का ज्ञान नहीं मिल पा रहा है। विद्यालय में पहले तीन अतिथि शिक्षक थे, जिससे शिक्षण कार्य में राहत मिली थी। कहा है कि शासन ने हाईस्कूल से उच्चीकृत कर इंटर का दर्जा दिया गया, लेकिन शिक्षकों की तैनाती नहीं की गई।
वर्ष 2014 में 11वीं की कक्षा संचालित की गई, लेकिन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक तैनात नहीं किया गया। कहा कि शिक्षकों की कमी होने और अन्य स्कूल आठ किमी दूर से अधिक की दूरी में स्थित होने के कारण गांव के गरीब परिवारों की बालिकाओं को स्कूल छोड़ना पड़ रहा है।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य मनोज कुमार का कहना है कि शिक्षक न होने के कारण पिछले वर्ष 11वीं के बच्चों को प्रवेश इस विद्यालय में नहीं दिया गया। विद्यालय में मात्र छह से दसवीं तक की कक्षाएं चलाई जा रही हैं। अलग-अलग कक्षा होने के कारण उन्हें भी पढ़ाने में दिक्कत होती है। कब कौन सी कक्षा में पढ़ाया जाए और कौन सा विषय पढ़ाया जाए। समझ में नहीं आता। इससे कई महत्वपूर्ण विषय छूट जाते हैं।