आपदा के जख्म झेल रही केदारघाटी को संभलने में वक्त लगेगा, लेकिन सरकारी तंत्र की ढिलाई इस फासले को और बढ़ा रही है। आपदा के 19 दिन बाद भी कई स्थानों पर हालात में कोई सुधार नहीं है। केदारघाटी में विद्युत और संचार सेवा के बुरे हाल हैं।
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केदारघाटी का हाल जानने मैं बृहस्पतिवार सुबह रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी के लिए रवाना हुआ। रुद्रप्रयाग से आगे नौला पानी में केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद पड़ा था। यहां से पैदल चलकर कुछ दूर पर टैक्सी विजयनगर पहुंचा। यहां से तीन किमी पैदल चलकर मंदाकिनी नदी पार गंगानगर पहुंचा। यहां से गुप्तकाशी के लिए टैक्सी मिली। जगह-जगह सड़क पर मलबे से पटी थी।
सूना पड़ा है बाजार
गुप्तकाशी में बाजार सूना है। गुप्तकाशी से छह किमी दूर कमांड सेंटर पहुंचा। यहां मौजूद अधिकारियों ने बताया कि मौसम की खराबी के कारण केदारनाथ गए लोगों के लिए न तो रसद पहुंच पाई और न ही अन्य जरूरी सामान, जबकि गौरीकुंड के लिए चॉपर से तीन राउंड सामग्री भेजी जा चुकी है।
कैंप में एक प्रभावित पहुंचा, जिसके परिवार के सात सदस्य केदारनाथ हादसे में लापता हैं। उन्होंने अफसरों से चॉपर के जरिए देहरादून जाने के बारे में पूछा। प्रभावित की मनोदशा जाने बिना एक कमरे से जवाब मिलता है कि आप नाव से चले जाए। प्रभावित केदारनाथ त्रासदी का वास्ता देकर कहते हैं कि यदि आप इस प्रकार जनसेवा कर रहे हैं, तो बेहतर रहेगा कि न करें।
लेकिन वहीं एक अन्य अधिकारी जो हरिद्वार के एसडीएम थे, उन्होंने प्रभावित को ढांढस बंधाया और जानकारी दी।
तीन शवों के डीएनए नमूने लिए
इस दौरान मेरी मुलाकात डीआईजी जीएस मार्तोलिया से हुई। उन्होंने बताया कि एसपी विजिलेंस के नेतृत्व में 16 सदस्यीय दल गौरीकुंड से ऊपर पैदल रास्ते पर निकला है। इस दौरान गौरीकुंड से लौटे डा. एएन शर्मा ने बताया कि आज गौरीकुंड में पाए गए तीन शवों के डीएनए नमूने लिए गए हैं।
अपराह्न ढाई बजे कैंप से लौटे तो स्थानीय युवक विवेक नेगी और विशन सिंह राणा ने बताया कि जलप्रलय के बाद क्षेत्र में अब यह स्थिति है कि हल्की बारिश में ही लोग सहम जा रहे हैं।