बदरीनाथ धाम से माता-पिता के साथ पैदल यात्रा कर पहुंचे बाल यात्री भाई- बहन नगर के आपदा शिविर में पहुंचकर चर्चा का विषय बने रहे। उन्होंने खतरनाक पहाड़ियों और संकरे मार्गों का लगभग 32 किमी का सफर पैदल तय कर अपनी उम्र से कहीं बड़ा काम किया है।
शुक्रवार को बस अड्डे में निर्मल आश्रम के आपदा राहत शिविर में अपने मम्मी-पापा के साथ पहुंचे पांच वर्षीय गौरव और आठ वर्षीय दीया को शिविर सेवकों ने लोकल सवारी समझा।
प्रशासन ने बच्चों को हेलिकॉप्टर में नहीं बैठाया
जब उनके पिता बीएस सजवाण ने बताया कि यह बच्चे बदरीनाथ से विष्णुप्रयाग तक लगभग 32 किमी की दूरी पैदल तय कर आए हैं। तो लोग उनके हौसले की तारीफ किए बिना नहीं रह सके। मोरीगेट, दिल्ली निवासी सजवाण ने बताया कि वे बच्चों को बदरीनाथ धाम के दर्शनों के लिए ले गए थे।
मगर भारी बरसात से आई बाढ़ के कारण सड़कें बहने से आवागमन बाधित हो गया। फंसे यात्रियों को निकालने के लिए जवानों ने किसी तरह पैदल रास्ते बनाए। उन्होंने चार दिन हेलिकॉप्टर के लिए लाइन लगाकर गुजारे, नंबर आने पर अफसरों को बच्चों का हवाला दिया, मगर वह नहीं माने।
ऐसे में समय गंवाए बिना बदरीनाथ से पैदल चलने का निर्णय लिया। बताया कि वह बदरीनाथ से 27 जून की सुबह छह बजे निक ले थे। वहां से दुर्गम पहाड़ी मार्गों पर चलकर पांडुकेश्वर होते हुए गोविंदघाट पहुंच गए।
वहां रात्रि विश्राम किया और शुक्रवार सुबह आगे के सफर पर चल दिए। बताया कि इस बीच बच्चों ने भी उनके साथ पैदल यात्रा की। लगभग 10 किलोमीटर के बाद उन्हें ऋषिकेश के लिए आपदा राहत बस मिली, जिससे यहां तक पहुंचे।