किए गए पुण्य और पाप दोनों को अक्षय रखने वाली अक्षय तृतीया का पर्व सोमवार को पड़ रहा है। हरिद्वार के गंगा तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा मैया में डुबकी लगाई। भगवान राम को जन्म देने वाली त्रेता युग का शुभारंभ अक्षय तृतीया को ही हुआ था।
अक्षय तृतीया ऐसा पर्व है, जिस पर कोई भी मांगलिक कार्य बगैर सुझाए किया जा सकता है। शुक्रास्त होते हुए भी इस दिन देश में हजारों विवाह होंगे। यह ऐसा दिन है, जब पंडित से किसी मांगलिक कार्य की तिथि निकालवाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
यह दिन देव और पितृ दोनों संतुष्टि का दिन है। इस दिन विष्णु पूजन कर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से देव और पितृ दोनों के ऋणों से मुक्ति मिलती है। यह पर्व स्वयं सिद्घ पर्व और मुहूर्त प्रदान करने वाला है। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने वाले उनके लोक में निवास करने के अधिकारी बन जाते हैं।
हर की पैडी प्रात:काल से गंगा स्नान प्रारंभ शुरू हो गया। श्रद्धालुओं का आगमन दो दिनों से लगातार हो रहा है। रविवार को बहुत भारी भीड़ गंगा स्नान के लिए पहुंची।
अक्षय तृतीय राजस्थान का विशेष पर्व होने के कारण वहां से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन हुआ हैं। रविवार की शाम यात्रियों का आना निरंतर जारी है। इसी दिन गढ़वाल के पवित्र मंदिरों के कपाट खुलेंगे। चार धाम यात्रा भी तृतीया से प्रारंभ होगी।