केदारघाटी और दूसरे आपदा प्रभावित क्षेत्रों में वायरस और खतरनाक हो सकते हैं। ऋषिकेश और हरिद्वार के गंगा जल में वायरस लोड बढ़ने का अंदेशा पैदा हो गया है। स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने संक्रामक रोग विशेषज्ञों की टीम के अलावा यहां 40 डाक्टरों की टीम और भेजी है। साथ ही मनोरोग विशेषज्ञों की एक और टीम यहां पहुंच गई है।
जौलीग्रांट मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलोजी विभाग के प्रोफेसर डा. आरके अग्रवाल ने बताया कि लाशों के सड़ांध से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से मल्टीप्लाई कर सकते हैं। उनके तेवर और खतरनाक हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश और हरिद्वार के गंगाजल में वायरस लोड अधिक हो सकता है। इसके आगे धीरे-धीरे वायरस लोड घटता जाएगा।
कार्यवाहक महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डा. जेएस जोशी ने बताया कि संक्रामक रोग विशेषज्ञों की टीम कोलकाता से आई है। इसके अलावा केंद्र सरकार के 40 डाक्टरों की टीम भेजी है। इंस्टीट्यूट आफ ह्युमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज के विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय टीम भी आई है। विशेषज्ञों को अलग-अलग क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।
हरिद्वार, ऋषिकेश के गंगाजल की मानीटरिंग
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दैवी आपदा के मद्देनजर हरिद्वार और ऋषिकेश के गंगा जल की मानीटरिंग शुरू कर दी है। बोर्ड के सदस्य सचिव विनोद सिंहल ने बताया कि पानी में संक्रमण की आशंका से जांच की जा रही है।
जांच रिपोर्ट दो-चार दिन में आ जाएगी। यह देखा जा रहा है कि आपदा के कारण गंगा जल में वायरस और बैक्टीरिया का लोड बढ़ा है कि नहीं।