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पिता की मौत के दो दिन बाद बेटे ने किया अंतिम संस्कार

Thu, 20 Jun 2013 04:47 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
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बदरीनाथ में होटल में पानी घुसने पर यहां ठहरे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया।
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होटल में रुके सहारनपुर निवासी सविता और उसके रिटायर्ड बैंक अधिकारी पति भी सुरक्षित ठौर की तलाश में बाहर निकले।

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होटल के बाहर बाढ़ जैसे हालात में हर तरफ मौत की गूंज थी।

सविता और उसके पति एक-दूसरे का हाथ थामे पहाड़ पर ऐसे स्थान की तलाश कर रहे थे, जहां पानी का बहाव न हो। घंटों सुरक्षित स्थान की तलाश में सुबह हो गई।

पति का हाथ नहीं छोड़ा
सोमवार को पानी और मलबे के साथ आया हल्की गति का झोंका सविता के पति को लगा। वह चोटिल हो गए, साहसी सविता ने पति का हाथ नहीं छोड़ा।

तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार

मलबे से बचाया तो वह अचेत थे। सहायता के लिए घंटों चीखती रही, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। पति को खो चुकी सविता ने शव को सुरक्षित जगह रखा और बारिश रुकने, मदद मिलने का इंतजार करती रही।

मंगलवार रात प्रशासन की टीम ने पति के शव के साथ फफकती सविता से घर का पता और मोबाइल नंबर लिया।

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बुधवार तड़के साढ़े पांच बजे सविता के बेटे मुकेश नागपाल को प्रशासन ने पिता सुरेंद्र नागपाल की मौत होने, मां के जिंदा होने की सूचना दी। मुकेश तीन घंटे बाद मंगलवार सुबह सहस्रधार स्थित हैलीपैड पहुंच गया था। सुबह से शाम तक बदरीनाथ जाने के लिए व्यवस्था में लगा रहा। हैलीपैड संचालकों से रो-रो कर ले जाने की गुहार लगाता रहा लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा।
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दो लाख रुपए मांगे
मुकेश ने बताया कि उन्हें बदरीनाथ ले जाने के लिए दो लाख रुपये मांगे जा रहे थे। लेकिन इतनी रकम एडवांस देने के लिए उनके पास नहीं थी। रात भी हैलीपैड पर बीत गई, मां ने एक सिपाही के सहारे उससे संपर्क किया। लेकिन वह करते तो क्या?

तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत

बुधवार सुबह जो भी हैलीपैड पहुंचता, उससे रोते हुए मुकेश मां-पिता के पास तक एक बार पहुंचाने की गुहार लगा रहा था। सुबह दस बजे हैलीपैड पहुंचे सीएम विजय बहुगुणा के बेटे साकेत बहुगुणा को देखकर मुकेश हाथ जोड़कर रोने लगा।
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इसके बाद साकेत ने कंपनी संचालकों से उसे बदरीनाथ पहुंचाने को कहा और खुद चॉपर में सवार होकर मातली चले गए। तब जाकर उसे कंपनी संचालक बदरीनाथ ले गए। पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद मुकेश ने दून में मौजूद साथी को सूचना दी। मुकेश अपनी मां समेत अभी बदरीनाथ में ही फंसा हुआ है।
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