तपिश बढ़ते ही उत्तराखंड के जंगल तपने लगे हैं और वनाग्नि की घटनाएं शुरू हो गई हैं। वन विभाग ने तत्काल प्रभाव से अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां निरस्त करने का आदेश जारी कर दिए हैं।
सबसे अधिक आग उन जिलों के जंगलों में लग रही है जहां बारिश कम हुई थी। मुख्य वन संरक्षक की अगुवाई में सतर्कता विभाग का गठन कर दिया गया है। यहां वनाग्नि की सूचनाएं संकलित की जा रही हैं।
बारिश और बर्फबारी कम होने के कारण हिमालयी क्षेत्र के जंगलों में बीते सालों की तुलना में इस बार दो महीने पहले गर्मी शुरू हो गई थी। वनाधिकारियों ने फरवरी में ही जंगलों में आग लगने की घटनाओं की रिपोर्ट दे दी थी, लेकिन अब जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है वैसे-वैसे वनाग्नि का खतरा भी अधिक हो गया है।
बारिश कम होने से बढ़ रही वनाग्नि की घटनाएं
अधिकारियों का कहना है कि रुद्रप्रयाग, चमोली, पौड़ी आदि जिलों में इस बार बारिश कम हुई थी जिससे यहां वनाग्नि की घटनाएं बढ़ रही हैं। उत्तरकाशी और अन्य जिले जहां बारिश अधिक रही जंगलों में थोड़ी राहत है।
जिन जंगलों में वनाग्नि का खतरा अधिक है वहां क्रीव स्टेशन स्थापित कर दिए गए हैं। इन स्टेशनों पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए वायरलेस सेट दे दिया गया है।
मुख्य वन संरक्षक बीपी गुप्ता की अगुवाई में सतर्कता विभाग गठित कर दिया गया है। अपर प्रमुख वन संरक्षक गढ़वाल गंभीर सिंह ने बताया कि वनाधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। वनाग्नि से बचाव के उपाय किए जा रहे हैं।