उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में मत्स्य पालन पर भी आपदा की मार पड़ गई है। पिछले साल अगस्त की बाढ़ में कल्डियाणी ट्राउट प्रजनन प्रक्षेत्र तबाह हुआ तो इस साल गंगोरी गरमपानी स्थित मत्स्य प्रजनन प्रक्षेत्र उजड़ गया।
ऐसे में मछली बीजों की आपूर्ति न होने से मत्स्यपालन पर टिकी सैकड़ों ग्रामीणों की आजीविका खतरे में पड़ गई है। गंगा और यमुना समेत दर्जनों छोटी-बड़ी नदियों तथा सैकड़ों गदेरों वाले उत्तरकाशी जनपद में मत्स्य पालन की काफी संभावनाएं हैं।
असी गंगा तो ट्राउट मछली के लिए प्रख्यात है। जिले में सैकड़ों लोग इससे आजीविका चला रहे हैं। असी गंगा घाटी के कल्डियाणी तथा गंगोरी गरम पानी स्थित मत्स्य प्रजनन प्रक्षेत्र से मछली के बीज इन लोगों को उपलब्ध कराए जाते थे।
पिछले साल अगस्त में आई बाढ़ में कल्डियाणी स्थित ट्राउट प्रजनन प्रक्षेत्र तबाह हो गया था। विभाग अभी तक इसके पुनर्निर्माण के लिए जगह भी नहीं तलाश पाया। अब जून में आई बाढ़ में भागीरथी नदी के किनारे गंगोरी गरम पानी स्थित मत्स्य प्रजनन प्रक्षेत्र उजड़ गया है।
क्या कहतें हैं जानकारः
'अपने खेतों में तीन तालाब बनाकर चार साल से मछलियां पाल रहा हूं। इस बार की आपदा में एक तालाब क्षतिग्रस्त हो गया। अब बीज नहीं मिले तो तीनों तालाब बेकार होने से आय का जरिया समाप्त हो जाएगा।'
बलवीर लाल, मत्स्य पालक बमणती चिन्यालीसौड़।
'कल्डियाणी ट्राउट प्रजनन प्रक्षेत्र तबाह होने पर इसके पुनर्निर्माण के लिए ढाई करोड़ का प्रस्ताव दिया गया था। अभी जगह का चयन नहीं हो पाया है। गंगोरी गरमपानी वाले प्रक्षेत्र में दो बड़े तालाब क्षतिग्रस्त हुए हैं। यहां 60 लाख की क्षति का आंकलन किया गया है। स्थल चयन एवं बजट मिलने पर इनका पुनर्निर्माण कराया जाएगा।'
विशेश्वर प्रसाद, ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक उत्तरकाशी।