उत्तराखंड़ में जून माह में आई आपदा ने जितना सीधे नुकसान किया, उससे ज्यादा झटका आफ्टरशाक से लगा है।
इंडस्ट्रीज एसोसिएशन आफ उत्तराखंड ने नुकसान का जो आकलन किया है, अगर उसे मानें तो रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी जैसे जिलों में हुए नुकसान से ज्यादा झटका उन स्थानों के उद्योग व्यापार पर पड़ा है, जो इससे परोक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं।
आकलन में हरिद्वार, नैनीताल समेत ऋषिकेश, मसूरी ऐसे स्थान निकलकर सामने आए हैं, जहां व्यवसाय, रोजी-रोटी लगभग चौपट हो गई। 5000 से अधिक लोगों पर सीधे चोट पड़ी है।
यह स्थान प्रदेश की अर्थ व्यवस्था के आक्सीजन माने जाते रहे हैं। होटल, टूर-ट्रेवल्स वालों के साथ ही कुमाऊं स्थित पिथौरागढ़ के तकरीबन एक हजार बुनकर इस आपदा से बैठ गए हैं।
एसोसिएशन की तरफ से उद्योगों को अपने पैरों पर फिर से खड़ा करने के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है। पदाधिकारियों की इस संबंध में बैंकों और सरकार से बात हो चुकी है। अब अगले कदम का इंतजार है।
यह हैं प्रस्ताव में शामिल मुख्य बिंदु
-आपदा प्रभावितों के ऋण और ब्याज को पूरी तरह माफ करें।
-व्यवसायियों पर से वैट को पूरी तरह से खत्म किया जाए।
-बिजली के संबंध में लागू न्यूनतम उपभोग की शर्त को खत्म करें।
-नया लोन लेने में स्टांप ड्यूटी को भी खत्म किया जाए।
-नए सिरे से उद्यम व्यवसाय खड़ा करने को इंफ्रास्ट्रक्चर मिले।
अब कार्रवाई का इंतजार
'नुकसान का आकलन हो चुका है। हम लोगों ने एक प्रस्ताव बनाकर सरकार और बैंकों को दिया है। अब उनकी तरफ से कार्रवाई का इंतजार है।'
पंकज गुप्ता, अध्यक्ष-इंडस्ट्रीज एसोसिएशन आफ उत्तराखंड