पूरे देश की निगाहें उत्तराखंड पर अटकी हुई हैं। पानी से पहाड़ों पर आई तबाही की चपेट में देश के लगभग हर प्रांत के लोग आए हैं। राजधानी के आपदा कंट्रोल रूम में देश के हर प्रांत से फोन आ रहे हैं।
गढ़वाल मंडल के कमिश्नर सुवर्धन ने बताया कि जिन क्षेत्रों में हेलीकाप्टर नहीं जा पा रहे वहां फौज भेजी जा रही है।
एक हजार फोन कॉल आईं
रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों की वादियों में आंध्रप्रदेश, बिहार, झारखंड, यूपी, पश्चिम बंगाल, गुजरात, जम्मू, यूपी, मध्यप्रदेश समेत अन्य प्रांतों के लोग फंसे हुए हैं।
तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार
बृहस्पतिवार को आपदा कंट्रोल रूम में दोपहर तक विभिन्न प्रांतों से एक हजार फोन कॉल आईं। सबसे अधिक फोन कॉल आंध्रप्रदेश, यूपी, और जम्मू की थीं। जम्मू के कॉलर राजेश ने बताया कि घरवालों से हादसे के एक दिन पहले बात हुई थी। उसके बाद से किसी का पता नहीं चल रहा है।
यूपी से सुल्तानपुर, अलीगढ़, बाराबंकी, मेरठ और सहारनपुर से सबसे अधिक फोन आए हैं। इन जिलों के सारे यात्री केदारनाथ में फंसे हैं। उत्तराखंड से हरिद्वार से सबसे अधिक फोन आ रहे हैं। शासन ने वेबसाइट पर बचाए जाने वाले यात्रियों का ब्योरा देना शुरू कर दिया है। वेबसाइट को एक दिन में हजारों लोग क्लिक कर रहे हैं।
नेट पर दिया जा रहा नाम-पता
शासन के अधिकारियों का कहना है कि नेट पर नाम-पता दिया जा रहा है, जिससे लोग अपने घरवालों की पहचान कर लें। कमिश्नर सुवर्धन ने बताया कि अधिकांश लोग ऐसे स्थानों पर फंसे हैं, जहां हेलीकाप्टर नहीं जा पा रहा है। उन स्थानों पर फौज के जवान भेजे जा रहे हैं।
पहाड़ पर मिलेगा हेलीकाप्टर का ईंधन
प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने आश्वासन दिया है कि राहत कार्य में लगे हेलीकाप्टरों को पहाड़ पर ही ईंधन उपलब्ध कराया जाएगा। इस संबंध में सांसद तरुण विजय ने प्रधानमंत्री से बात की थी। सांसद ने बताया कि हेलीकाप्टरों को ईंधन के लिए जोलीग्रांट एयरपोर्ट आना पड़ता है।
तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत
अगर हेलीकाप्टर के ईंधन एटीएफ को गोचर, चिनयाली और सौड़ में उपलब्ध करा दिया जाए तो बचाव कार्य में तेजी आ जाएगी। ईंधन को पहाड़ों पर दूसरे हेलीकाप्टरों के माध्यम से एयर लिफ्ट करा लिया जाए। सांसद तरुण विजय ने बताया कि इसके अलावा प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया है कि जितनी आवश्यकता होगी, उत्तराखंड को उतनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।