आपको बेशक अजीब लगे, लेकिन यह सच है। राजधानी की बारिश महज एक गिलास में समा जाती है।
राज्य मौसम केंद्र के ईसी रोड स्थित परिसर में लगे उपकरण, जिसे मेजरिंग गिलास कहा जाता है, में टपके पानी के माप को ही राज्य मौसम केंद्र राजधानी देहरादून की बारिश का रिकॉर्ड बता जारी कर रहा है। यहां मैनुअल रिकार्डिंग भी होती है और ऑटोमेटिक भी।
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इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों में होने वाली बारिश नापने का कोई पैमाना विभाग के पास नहीं। इससे मुश्किल यह है कि अगर आप राजपुर में रहते हैं और वहां बारिश की मात्रा जानना चाहते हैं तो नहीं जान पाएंगे। इसी मुश्किल से ईसी रोड, सर्वे चौक छोड़ शहर के अन्य सभी क्षेत्र वालों को गुजरना पड़ रहा है।
अगर अलग-अलग क्षेत्रों में उपकरण लगाए जाते तो शहरवासियों के लिए बेहतर रहता, खास तौर पर उन क्षेत्रों में जहां बारिश की वजह से संकट की स्थिति खड़ी हो जाती है।
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जौलीग्रांट एयरपोर्ट समेत अन्य संस्थानों के पास मसलन केंद्रीय मृदा एवं जल अनुसंधान, संरक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान, वन अनुसंधान संस्थान के पास अपना उपकरण है। लेकिन इनकी रिकॉर्डिंग मौसम विभाग के आंकड़ों में शुमार नहीं होती।
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मौसम की प्रदेश भर में चार मैनुअल ऑब्जरवेटरी और 40 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन हैं। इनसे मौसम पर निगाह रखी जाती है। हां, ईसी रोड स्थित केंद्र में बारिश मापी जाती है। अन्य स्थानों के लिए भी उपकरण हो तो मदद होगी, लेकिन यह बेहद महंगे हैं। 10-10 लाख के उपकरण हैं।
- आनंद शर्मा, निदेशक राज्य मौसम केंद्र
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