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अब टिहरी बांध झील से खतरा

Tue, 30 Jul 2013 10:39 AM IST
उत्तरकाशी/ब्यूरो
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टिहरी बांध झील का जलस्तर बढ़ने के साथ ही झील में जमा भारी कचरा बस्ती के आसपास पसर गया है। कचरे में बड़े पैमाने पर लकड़ी के साथ ही पशुओं के शव तथा तमाम तरह की गंदगी जमा है। इससे उठती दुर्गंध तटवर्ती आबादी के लिए बीमारियों को न्यौता दे रही है। देवीसौड़ पुल झील में समाने के बाद यह कचरा यहां मोटर बोट संचालन में भी दिक्कतें खड़ी करेगा।
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टिहरी बांध झील का जलस्तर 812 मीटर तक पहुंच गया है। ऐसे में बाढ़ के दौरान झील में जमा कचरा भी यहां पीपलमंडी, चिन्यालीसौड़ बस्ती के किनारे पसर गया है। कचरे में बड़े पैमाने पर बाढ़ में बहकर आई बेशकीमती लकड़ी जमा है। वन विभाग इस लकड़ी को निकालकर खासा राजस्व जुटा सकता है। बीते साल वन विभाग द्वारा सुध न लेने पर प्रशासन ने यहां जमा लाखों की लकड़ी महज 52 हजार रुपये में नीलाम कर दी थी।

कचरे में दर्जनों मृत पशुओं के शव भी तैर रहे हैं। दिचली गमरी क्षेत्र को जोड़ने वाले देवीसौड़ पुल को झील कभी भी आगोश में ले लेगी। बीती बरसात में धरासू-जोगथ मोटर मार्ग नेरी गांव के नीचे पूरी तरह ध्वस्त पड़ा है। ऐसे में इस क्षेत्र के 40 से अधिक गांवों की आवाजाही यहां टीएचडीसी द्वारा चलाई जाने वाली मोटर बोट सेवा पर ही निर्भर रहेगी। लेकिन यहां जमा कचरा मोटरबोट संचालन में आड़े आएगा। क्षेत्र के जीत सिंह राणा, उदयपाल परमार, विशन सिंह चौहान, कलम सिंह आदि ने इस कचरे को शीघ्र हटवाने की मांग की है।
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झील में जमा कचरा हर लिहाज से नुकसानदायक है। समय रहते इसे हटाना जरूरी है। कचरा निस्तारण की जिम्मेदारी नगर पंचायत को सौंपी जाए तथा इस पर आने वाला खर्च टीएचडीसी वहन करे।
- शूरवीर सिंह रांगड़, अध्यक्ष नगर पंचायत चिन्यालीसौड़

झील में जमा कचरे से उठती दुर्गंध तथा इस दूषित पानी के उपयोग से बीमारियों का खतरा है। फिलहाल इस तरह के केस नहीं आए हैं लेकिन बीमारियों से बचने के लिए कचरा हटा दिया जाना चाहिए।
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- डा. जितेंद्र भंडारी, प्रभारी चिकित्साधिकारी चिन्यालीसौड़

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