उत्तराखंड में आई आपदा में लापता हुए लोगों के नाम सरकारी दस्तावेजों में तो हैं लेकिन वह गायब हैं। गायब लोगों के परिजन इस बात से हतप्रभ हैं कि जब प्रशासन ने उनके परिजनों को ढूंढ निकाला था तो फिर वह आखिर लापता कैसे और कंहा हो गए।
यूपी के देवरिया निवासी रवि मिश्रा परेशान हैं। उनके माता-पिता केदारनाथ गए थे। आपदा के बाद परिवार को उनकी चिंता सताने लगी। 17 जून को फोन मिलाया तो पता चला कि दोनों गोपेश्वर में थे। उन्हें सेना ने केदारनाथ से सुरक्षित निकाल लिया था।
इसके बाद रवि और परिजन उनके घर पहुंचने का इंतजार करने लगे। लेकिन एक महीने बाद भी वे घर नहीं लौटे। फोन भी नहीं लगा। आखिर रवि ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन कहीं पता नहीं चला।
अब रवि की समझ में नहीं आ रहा कि माता-पिता गए कहां। रूंधे गले से वह सवाल पूछते हैं, दोनों बचा लिए गए थे तो फिर लापता कैसे हो गए।
रवि ने बताया कि गांव से सात लोग केदारनाथ गए थे। इनमें से अब तक दो ही घर लौटे हैं, बाकी पांच कहां हैं उन्हें भी नहीं मालूम। दून में रवि की मदद कर रही एडवोकेट अल्पना जदली ने बताया कि वे दून, कोरोनेशन, जौलीग्रांट, मैक्स समेत सारे अस्पताल छान चुके हैं, लेकिन पता नहीं चला।
दून अस्पताल में भर्ती कुछ लोगों ने रवि के माता-पिता को सुरक्षित गोपेश्वर पहुंचाए जाने की बात बताई। पर अब वे कहां हैं पता नहीं चल रहा।
अल्पना बताती हैं कि यह अकेला ऐसा मामला नहीं है। कई लोग आपदा से बचने के बावजूद लापता हैं। ऐसे में साफ जाहिर है कि प्रशासन के दस्तावेज झूठ से पुते हुए हैं।
ये भी हैं लापताः
-बिंदा कुमार त्रिपाठी गोरखपुर (यूपी) पिता की तलाश में भटक रहे हैं। बिंदा ने टीवी पर पिता को सेना के जवान की पीठ पर बचाकर लाते हुए देखा था, लेकिन अब वह कहां हैं, पता नहीं चल रहा।
-नसूलागंज (यूपी) निवासी जगदीश पंवार ने 28 जून को घर फोन कर अपनी लोकेशन केदारनाथ से रुद्रप्रयाग के बीच बताई। लेकिन अब तक घर नहीं पहुंचे।
-सुल्तानपुर (यूपी) निवासी राकेश कुमार और उमाकांत मौर्य परिजनों की तलाश में भटक रहे हैं। उनके परिजन गौरीकुंड पहुंच गए थे, लेकिन अब तक उनका कोई पता नहीं है।
-करौली, राजस्थान निवासी सावित्री और हाबू माली ने आखिरी बार 22 जून को घर पर बात की थी। खुद को सुरक्षित बता जल्द घर आने को कहा था, लेकिन इसके बाद से लापता हैं।
-जगन्नाथ पांडे, देवमणि पांडे निवासी फैजाबाद (यूपी) से उनके परिजनों की बात 18 जून को अंतिम बार हुई। तब से उनका कुछ पता नहीं है।
-गोरखपुर (यूपी) निवासी जयप्रकाश श्रीवास्तव पत्नी मिथिलेश और तीन परिजनों संग 16 जून को गुप्तकाशी में देखे गए। बेटा ब्रह्मस्वरूप तलाश में भटक रहा है, वह गौरीकुंड जाना चाहता है।