उत्तराखंड आपदा को लेकर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा सरकार के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस नेताओं में अंदर ही अंदर आग सुलग रही है।
कांग्रेस हाईकमान द्वारा प्रदेश नेताओं को संयम बरतने की सलाह का असर भी पड़ता नजर नहीं आ रहा है और उन्होंने अपनी शिकायतें शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा दी हैं।
पार्टी सांसद अपने संसदीय क्षेत्रों में फंसे लोगों तक राहत और बचाव नहीं पहुंचने से नाराज हैं तो कई विधायक भी मुख्यमंत्री की कार्यशैली से नाराज हैं।
पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक उत्तराखंड की प्रभारी कांग्रेस महासचिव अंबिका सोनी से मुलाकात में नेताओं व सांसदों ने राज्य सरकार की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जाहिर की है।
हाईकमान ने नेताओं को अभी संयम बरतने की बात कहते हुए राहत और बचाव अभियान खत्म होने के बाद उनकी शिकायतों पर सुनवाई करने का भरोसा दिया है।
पार्टी सांसद प्रदीप टम्टा ने अमर उजाला से कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र में धारचूला और मुंश्यारी में फंसे एक हजार यात्रियों को निकालने की कोशिश की जानी चाहिए।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत के समर्थक माने जाने वाले टम्टा ने कहा कि नया उत्तराखंड बनाने की बात तो कही जा रही है मगर हिमालय पर बढ़ रहे संकट के समाधान की बात कोई नहीं कर रहा है। इस दिशा में भी कदम उठाने की जरूरत है।
टम्टा समेत रावत के सभी समर्थक भी बहुगुणा सरकार की कार्यशैली से नाराज हैं। उत्तराखंड की त्रासदी के बाद बहुगुणा सरकार के खिलाफ कई विधायक अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से प्रकट कर चुके हैं।
इसके अलावा कांग्रेस के अन्य नेता भी अपना रोष जाहिर करने लगे हैं। केदारनाथ से विधायक शैला रानी रावत मुख्यमंत्री के खिलाफ गुस्सा निकाल चुकी हैं, जबकि कांग्रेस नेता हरीश ध्यानी तो राज्य सरकार के खिलाफ धरने पर ही बैठ गए थे। बदरीनाथ के विधायक भी मुख्यमंत्री से खुलेआम तू-तू-मैं-मैं कर चुके हैं।