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कौन है जिम्मेदार... पेयजल के लिए नौलों-धारों पर लगती है कतार

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किमतोली-चमदेवल सड़क की दुर्दशा दिखाते गड्ढे। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT
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किमतोली/चमदेवल (चंद्रशेखर जोशी)। किमतोली का लोहाघाट से फासला महज दस किमी है लेकिन यहां पेयजल की समस्या आजादी के 75 साल बाद भी दूर नहीं हुई है। अलग राज्य गठन के भी 21 साल बीत चुके हैं लेकिन सत्ता संभालने वाली सरकारों ने इस मूलभूत समस्या के निवारण का प्रयास नहीं किया। आज भी गांव के लोग प्यास बुझाने के लिए नलों के बजाय नौलों और हैंडपंपों पर आश्रित हैं। गांव में एक भी सरकारी पेयजल योजना नहीं होने से 595 की आबादी वाले इस गांव के पास कोई दूसरा विकल्प है ही नहीं। हर घर नल योजना भी इस गांव के लिए अर्थहीन है। वहीं चमदेवल गांव के लोगों के लिए साफ पानी सपने सरीखा है। हैंडपंप से निकलने वाला मटमैला पानी पेट के विकार बढ़ा रहा है।
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नेपाल सीमा से लगा गुमदेश क्षेत्र लोहाघाट विधानसभा सीट का हिस्सा है। इसी हिस्से में किमतोली और चमदेवल हैं। इलाज की सुविधा से दूर ग्रामीणों के लिए गांव में चंद निजी क्लीनिक सहारा बनते हैं और फिर चमदेवल से 23 किलोमीटर दूर लोहाघाट की दौड़ लगाना बेबसी है। ग्रामीण कहते हैं कि बीमार व्यक्ति को इलाज से पहले उबड़-खबड़ सड़क पर झटके सहने पड़ते हैं। किमतोली-चमदेवल की 13 किलोमीटर की सड़क पर गड्ढों की भरमार है। सड़क पर कई जगह पड़े ये गड्ढे विकास के दावों से लेकर गुणवत्ता तक को चौराहे पर ला देते हैं। लोग कहते हैं कि इन गड्ढों के कारण मरीजों को तकलीफों के बीच सफर करना होता है तो सामान्य वाहन को इस दूरी को पार करने में 25 मिनट के बजाय 40 मिनट से अधिक लगता है।
गांव के लोगों की आमदनी खेती के आसरे होती थी लेकिन उस पर भी जंगली जानवरों का साया है। परेशान ग्रामीणों का कहना है कि समस्याएं सुलझाने के लिए कोई असरदार कदम उठाने में किसी नेता के प्रयास जमीनी स्तर पर नजर नहीं आए हैं। दोनों क्षेत्रों के 1534 वोटर 14 फरवरी को वोट के जरिये क्षेत्र की अनदेखी का जवाब देने का दावा कर रहे हैं। लोनिवि के जेई पीसी नरियाल का कहना है कि अब किमतोली-चमदेवल सड़क को पुल्ला-जाख-निडिल होकर आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे इसकी दूरी 13 किमी से बढ़कर 14.600 किमी हो गई है। पुल्ला-बिल्देधार में डामरीकरण के लिए अनुबंध बनाया जा रहा है।
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राजाज्ञा के साढ़े छह साल बाद भी उप तहसील का संचालन नहीं
चंपावत। गुमदेश क्षेत्र के लोगों ने प्रशासनिक फासले को कम करने के लिए उप तहसील की आवाज उठाई और उनकी आवाज ने असर दिखाया। नेपाल सीमा से लगे गुमदेश क्षेत्र की 41 ग्राम पंचायतों के लिए जून 2015 में पृथक उप तहसील की राजाज्ञा जारी हुई। राजस्व गांव गुरेली (खालगढ़) को उप तहसील मुख्यालय के रूप में मंजूरी मिली लेकिन उप तहसील का संचालन शुरू नहीं हो सका है। गुमदेश विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष माधो सिंह अधिकारी का कहना है कि उप तहसील का संचालन न होने से नेपाल के सीमावर्ती लोगों को खतौनी की नकल, आधार कार्ड, स्थायी निवास, जाति, आय प्रमाणपत्र के साथ जरूरी दस्तावेज बनाने के लिए लोहाघाट जाना पड़ रहा है।
समस्याएं सुलझाने के लिए चुनाव मैदान में उतर गए धामी
चंपावत। चमदेवल में दुकान चलाने वाले प्रकाश सिंह धामी कहते हैं कि क्षेत्र में विकास के हालात बहुत खराब हैं। अस्पताल, रास्ते, साफ पानी आदि मूलभूत सुविधाओं का सुधलेवा कोई नहीं है। खूब पिछड़ापन है। इसी कारण कोई नेता सुनने के लिए तैयार नहीं। हालात न बदलने पर वे खुद ही वर्ष 2017 के चुनाव में मैदान में उतर गए। कहते हैं कि इन मुद्दों को लेकर इस बार भी मैदान में उतरेंगे।
क्या बोले अधिकारी
किमतोली के लिए पंपिंग योजना प्रस्तावित की जा रही है। आधारभूत ढांचे की अनुपलब्धता से लेकर राजस्व अधिकारियों-कर्मियों की कमी उप तहसील के संचालन में आड़े आई है। इन कमियों के दूर होने पर उप तहसील का संचालन शुरू हो जाएगा। - विनीत तोमर, डीएम, चंपावत।
मतदाताओं की राय
इलाके में कुछ भी सुधार नहीं हुआ है। न सेहत सुधरी, न रास्ते ठीक हुए। कोरोना काल में भी सत्ता या विपक्ष के किसी नेता ने मदद तो दूर, संवेदना के दो बोल भी नहीं कहे। यहां तो सांसद भी आने से कतराते हैं। - कृष्ण सिंह धौनी, चमदेवल।
नेता चुनाव के समय बहुत कुछ कहते हैं, लेकिन करते कुछ नहीं। दोबारा गांव में पलट कर भी नहीं आते हैं। जब लोगों के बीच नेता आएंगे ही नहीं, तो समस्या कैसे जानेंगे और कैसे समाधान होगा। - गणेश चंद्र, चमदेवल।
यहां तो काम शून्य है। पेयजल की स्थिति अक्तूबर की आपदा के बाद तो बदतर है। शाम ढलने पर बिजली कटौती होती है। हमारी ओर कोई देखता नहीं और हमारी आवाज भी कहीं नहीं सुनी जा रही है। - तारा सिंह धौनी, चमदेवल।
कई जगह गड्ढों के कारण किमतोली-चमदेवल रोड के बुरे हाल हैं। मरीज को लाने, ले जाने में दिक्कत होती है। सामान्य सफर भी कतई आसान नहीं है। - चंद्रा देवी, चमदेवल।
छिटपुट काम तो हुए हैं, लेकिन स्वास्थ्य की सुविधा बेहतर नहीं हो सकी है। इस वजह से 23 किमी दूर लोहाघाट जाना मजबूरी है। - भुवन धौनी, चमदेवल।
किमतोली गांव के लोग प्यास बुझाने के लिए पानी ढोने के लिए मजबूर हैं। नेता वादे खूब करते हैं, लेकिन पूरा करना भूल जाते हैं। पेयजल की एक भी सरकारी योजना तैयार नहीं हो सकी है। - योगेश अधिकारी, किमतोली।
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