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जब वोट डालने के लिए एक दिन पूर्व घर से जाते थे मतदाता

Fri, 29 Mar 2019 11:10 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन  सतीश जोशी ‘सत्तू’ चंपावत।
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चंपावत के बुजुर्ग मतदाता जयदत्त - फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 11 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की सरगर्मियां बढ़ने लगी हैं। कार्यकर्ता अपने समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में वोट मांगने के लिए दूरस्थ गांवों के चक्कर काटने लगे हैं। अतीत में मतदान केंद्रों की दूरी अधिक होने के कारण लोगों को वोट डालने के लिए वोटिंग से एक दिन पूर्व ही अपने घरों से निकलना पड़ता था।

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बडोली के ग्रामीण जयदत्त (70) को आज भी वह घटना याद है जब उन्हें अपने पिता के साथ बचपन में पहली बार वोटिंग की प्रक्रिया देखने का मौका मिला था। जयदत्त बताते हैं कि तब उनके गांव में मतदान केंद्र नहीं होता था। बडोली का सबसे नजदीकी पोलिंग बूथ करीब तीस किलोमीटर दूर प्राथमिक विद्यालय मौराड़ी में होता था।

तब गांव के फतेह राम उर्फ सेठ जी के नेतृत्व में उनके पिता बेनी राम, चाचा लालमणी भट्ट, शिरोमणि भट्ट सहित कई अन्य ग्रामीण एक दिन पूर्व ही वोट डालने के लिए घर से निकल जाते थे। वह मौराड़ी और आसपास के गांवों में रिश्तेदारी में रात बिताते थे और अगले दिन वोट डाल कर घर वापस लौटते थे। एक बार जिद करके वह भी अपने पिता के साथ वोटिंग की प्रक्रिया को देखने के लिए एक दिन पहले ही मौराड़ी पहुंचे थे।
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वर्ष 1967 के लोकसभा चुनाव में पहली बार डाला वोट
चंपावत। जयदत्त बताते हैं कि 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद उन्होंने वर्ष 1967 के लोकसभा चुनाव में पहली बार वोट डाला था। हालांकि उन्हें यह याद नहीं कि उस समय उन्होंने किस पार्टी के पक्ष में मतदान किया था लेकिन उन्हें याद है कि वोट डालने के दिन मौराड़ी क्षेत्र में जमकर हिमपात हुआ था और उन्हें वापस बडोली लौटने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। ब्यूरो

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