चंपावत में एक दिन छोड़कर मिल रहा पानी
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गर्मी बढ़ने के साथ ही चंपावत जिले की पेयजल सप्लाई भी हांफने लगनी है। चंपावत, लोहाघाट सहित अधिकांश जगहों में जरूरत के सापेक्ष बमुश्किल एक-चौथाई पानी मिल पा रहा है। जिला मुख्यालय में एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। हालांकि जल संस्थान को पानी वितरण के लिए एक और टैंकर मिल गया है।
चंपावत में रोजाना 11 लाख लीटर पानी जरूरत है, लेकिन आपूर्ति 2.4 लाख लीटर की ही हो रही है। इसके चलते नगर के लोगों को एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति की जा रही है। ज्यादातर सप्लाई टैंकरों, जीपों से हो रही है। जल संस्थान के जूनियर इंजीनियर एसएस थापा ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र विकास योजना (बीएडीपी) से चंपावत को तीन हजार लीटर का एक टैंकर इस माह मिल गया है। अब चंपावत के पास दो टैंकर होने से पेयजल आपूर्ति में सुधार हुआ है। चंपावत में जीआईसी मुहल्ला, गोरलचौड़ वार्ड और मांदली सबसे संवेदनशील इलाके हैं।
पानी के लिए भटक रहे कुलियालगांव के 20 परिवार
लधिया घाटी के कुलियालगांव गांव के 20 परिवार पेयजल के लिए दर-दर भटक रहे हैं। पानी न मिलने के कारण ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण एक किमी दूर लधिया नदी से पानी ढोकर प्यास बुझाने को मजबूर हैं। रमेश कुलियाल, हीरा सिंह, तेज सिंह, जमन सिंह, पान सिंह, प्रकाश सिंह, रोहित, योगेश, हीरा देवी, भावना देवी, गीता देवी, सरूली देवी आदि का कहना है कि गांव की पेयजल योजना से करीब 80 परिवारों को पेयजल कनेक्शन दिए गए हैं, जिसमें से निचली ढाल में रहने वाले 20 परिवारों के लोगों के यहां करीब दो महीनों से पानी नहीं आ रहा है। इसके चलते ग्रामीण गाड़-गधेरों का दूषित जल पीने को मजबूर हो रहे हैं। करीब तीन वर्ष पूर्व पांच किमी दूर रिखवाड़ी गधेरे से योजना बनी थी। जिसका रखरखाव ग्रामपंचायत को सौंप दिया था। ग्राम प्रधान महेश राम का कहना है कि पेयजल योजना का रखरखाव ग्रामीणों के हाथ में है। गर्मी के कारण पेयजल स्रोत में कमी आ गई है। विभाग का कहना है कि ग्रामीणों को साथ लेकर लाइन का निरीक्षण करने के साथ उसमें आई कमी को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।