चंपावत में टैंकर से पानी भरतें लोग।
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पाटी में भी पेयजल किल्लत शुरू हो गई है। कई जगह सात दिनों से नलों में एक भी बूंद पानी नहीं टपका। ग्रामीण गाड़-गधेरों से पानी ढोने को मजबूर हो रहे हैं। बोर्ड परीक्षार्थियों को भी पढ़ाई के साथ पानी ढोने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कई लोगों पर पेयजल लाइनों में टुल्लू पंप लगाने का भी आरोप लगाया है।
पाटी में सात दिनों से मल्ली पाटी, स्टेट बैंक कालोनी, मष्टा मंदिर कालोनी, स्टेशन चौराहा, शास्त्री मार्केट, माराकुली आदि जगहों पर लोग पानी को तरस रहे हैं। लोग सुबह चार बजे से ही स्टेशन में लगे हैंडपंप से पानी भरने के लिए लाइन लगा रहे हैं। पाटी बाजार में विभाग दस हैंडपंप लगाए गए हैं, मगर इनमें से छह हैंडपंपों में बूंद-बूंद पानी टपक रहा है। ऐसे में लोगों की निर्भरता चार हैंडपंपों पर है। लोगों ने जल संस्थान से पेयजल आपूर्ति सुचारु करने के साथ टुल्लू पंप का उपयोग करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है। जल संस्थान के अधिकारियों ने टुल्लू पंप लगाने वालों पर कार्रवाई के साथ ही आपूर्ति बेहतर करने का भरोसा दिलाया है।
चंपावत में भी पानी का संकट, टैंकर से बंट रहा पानी
चंपावत। गर्मी से जल स्रोतों में हो रही गिरावट की मार पेयजल आपूर्ति पर पड़ रही है। जिला मुख्यालय में लोगों को रोजाना तो दूर, एक दिन छोड़कर भी पानी मिलना मुश्किल हो रहा है। हालात से निपटने के लिए जल संस्थान टैंकर, पिकप से पानी बांट स्थिति सामान्य करने की जुगत कर रहा है।
चंपावत में इन दिनों अधिकांश जल स्रोतों में 70 प्रतिशत तक गिरावट आ चुकी है। इस कारण यहां प्रतिदिन 11 लाख लीटर के सापेक्ष 2.4 लाख लीटर ही पानी मिल पा रहा है। नतीजा यह हो रहा है कि लोग दो दिन में एक बार पानी के लिए जूझ रहे हैं। जल संस्थान के जूनियर इंजीनियर एसएस थापा का कहना है कि अधिक किल्लत वाले इलाकों में टैंकर और पिकप से पानी की आपूर्ति की जा रही है। रविवार को कनलगांव, भैरवा, गोरलचौड़ में पानी बांटा गया।