चंपावत के त्यारकूड़ा में टैंकर से पानी भरते लोग।
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गर्मी बढ़ने के साथ ही जिले में पेयजल संकट बढ़ते जा रहा है। नगर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी पीने के पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। जल संस्थान को वैकल्पिक माध्यमों से पेयजल आपूर्ति करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
पेयजल लाइनों से आपूर्ति न होने के कारण नागरिकों को प्राकृतिक जल स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है। पर्याप्त बरसात नहीं होने के कारण कई स्थानों में पेयजल योजनाओं के मूल स्रोत सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं। जिला मुख्यालय में प्रतिदिन 1.50 एमएलडी पानी की आवश्यकता के सापेक्ष तीन पेयजल योजनाओं से महज 0.5 एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है।
जल संस्थान की ओर से जिला मुख्यालय के लिए छीड़ापानी, च्यूराखर्क और फूंगर पेयजल योजना से जलापूर्ति की जाती है, लेकिन योजनाओं के मूल स्रोतों में पानी कम होने के कारण लोगों के नालों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
कई स्थानों में नलों में तीन चार दिन बाद पानी पहुंच रहा है। जल कल अभियंता एसएस थापा के अनुसार पिछले साल भी बरसात कम होने से इसी तरह के हालाता रहे। जल संस्थान पानी के संकट को दूर करने के लिए प्रतिदिन 50 हजार लीटर पानी नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में बांट रहा है। जल संस्थान रोजाना चार पिकप और दो टैंकरों से पानी बांट रहा है।