चंपावत। ये तस्वीर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में धन की बर्बादी से ज्यादा असंवेदनशीलता को दर्शाती है। जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर के उप जिला अस्पताल में पिछले साल आए वेंटिलेटरों का उपयोग तो नहीं हो सका, लेकिन इससे पहले ही ये खराब हो गए और बुधवार को इन वेंटिलेटरों को मरम्मत के लिए भेज दिया गया।
पिछले साल कोरोना काल में जिले के तीन अस्पतालों में सघन निगरानी केंद्र (आईसीयू) स्थापित किए गए थे। चंपावत जिला अस्पताल के अलावा लोहाघाट और टनकपुर उप जिला अस्पताल में बनाए गए आईसीयू में वेंटिलेटर लगाए गए। पांच बेड वाले टनकपुर अस्पताल में तीन वेंटिलेटर लगाए गए थे। आईसीयू कक्ष के निर्माण में देरी से ये आईसीयू चल नहीं सका। अब इन्हें संचालित कराने के लिए सोमवार को सर्विस इंजीनियरों की टीम आई, तो वेंटिलेटर चले ही नहीं। सीएमएस डॉ. एचएस ह्यांकी का कहना है कि दो वेंटिलेटर काम नहीं कर रहे थे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने तीनों वेंटिलेटरों के परीक्षण और सर्विसिंग के लिए कंपनी को भेज दिया है। वहीं बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने चंपावत से चार वेंटिलेटर टनकपुर भेज दिए हैं।
सिर्फ चंपावत का आईसीयू कर रहा है काम
चंपावत। जिले में दो करोड़ रुपये से अधिक लागत से तीन आईसीयू बने हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ एक आईसीयू संचालित है। छह बेड और चार वेंटिलेटर वाला चंपावत जिला अस्पताल का आईसीयू काम कर रहा है। पीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि आईसीयू का संचालन हो रहा है। कुल 10 मरीजों की जिंदगी इसके जरिये बचाई जा चुकी है। आईसीयू के लिए सृजित पदों पर तैनाती के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय को पत्र भी भेजा गया है। जिला अस्पताल में आईसीयू के संचालन के लिए डीएम विनीत तोमर ने अन्य जगहों से डॉक्टर, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और एएनएम की व्यवस्था की है। (संवाद)
कोट
लंबे समय से इस्तेमाल न होने से टनकपुर के वेंटिलेटर काम नहीं कर पाए। इसलिए टनकपुर अस्पताल ने इन वेंटिलेटरों को कंपनी को वापस भेज दिया है। कमी को ठीक कर जल्द ही ये वेंटिलेटर आ जाएंगे। बहरहाल बुधवार को विभाग ने चार वेंटिलेटर टनकपुर भेज दिए हैं।
- डॉ. आरपी खंडूरी, सीएमओ, चंपावत।